बिहार में एक तरफ मुख्यमंत्री Samrat Choudhary और राज्य सरकार के कई मंत्री प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील पर “नो व्हीकल डे” मना रहे हैं। कोई पैदल दफ्तर पहुंच रहा है तो कोई ट्रेन से सफर कर ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने का संदेश दे रहा है। लेकिन दूसरी तरफ सरकार के ही एक मंत्री चार गाड़ियों के काफिले के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचते नजर आए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, मामला Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के नेता और बिहार सरकार में गन्ना उद्योग मंत्री से जुड़ा है। जब मंत्री अपने काफिले के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि एक ओर सरकार सुविधा त्यागने और ईंधन बचाने का संदेश दे रही है, जबकि दूसरी ओर आप कई गाड़ियों के साथ चल रहे हैं। इस पर मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि - वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील से पूरी तरह सहमत हैं और सरकार लगातार ईंधन बचाने तथा प्रदूषण कम करने की दिशा में काम कर रही है। हम इसका पालन कर भी रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि “आदरणीय प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी का आदेश आया हुआ है। हम लोग ज्यादा से ज्यादा ईंधन बचाने और प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर गंभीर हैं। सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जनता से भी अपील की जा रही है कि आने वाले दिनों में ईंधन की बचत करें और प्रदूषण कम करने में सहयोग दें।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार के सभी मंत्री और अधिकारी अपने-अपने स्तर पर कोशिश कर रहे हैं कि कम गाड़ियों का इस्तेमाल हो और लोगों के बीच जागरूकता फैले। मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने बैठकों में भी इस विषय पर जोर दिया है और सभी जनप्रतिनिधियों को सादगी अपनाने का संदेश दिया गया है।
हालांकि मंत्री के बयान के बावजूद इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब सरकार खुद “नो व्हीकल डे” और ईंधन बचाने का अभियान चला रही है तो मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को पहले खुद उदाहरण पेश करना चाहिए। कई लोगों ने इसे “कथनी और करनी” का अंतर बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
गौरतलब है कि बिहार सरकार इन दिनों पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और ईंधन बचत को लेकर अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई मंत्री साइकिल, पैदल और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर लोगों को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि अगर आम लोग सप्ताह में एक दिन निजी वाहन का इस्तेमाल कम करें तो इससे पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
लेकिन मंत्री के काफिले की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है और क्या आने वाले दिनों में मंत्रीगण खुद भी “नो व्हीकल डे” अभियान का सख्ती से पालन करते नजर आएंगे।