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10-Jan-2026 09:06 PM
By First Bihar
PATNA: बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को लेकर पार्टी के ही कद्दावर नेता शिवानंद तिवारी ने खुलकर नाराज़गी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह केसी त्यागी को पार्टी और सत्ता के गलियारों से दूर किया जा रहा है, वह उन्हें कतई अच्छा नहीं लग रहा। साथ ही नीतीश कुमार से केसी त्यागी के पुराने राजनीतिक और व्यक्तिगत रिश्तों का ज़िक्र करते हुए शिवानंद तिवारी ने कई तीखे और भावनात्मक बयान दिए हैं, जो अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। जिसमें उन्होंने कहा है कि KC त्यागी को दूर किया जाना ठीक नहीं..
शिवानंद तिवारी ने आगे कहा कि केसी त्यागी नीतीश जी के आशिक़ हैं. लेकिन यह एक तरफा मोहब्बत की तरह है. एक वक़्त था जब नीतीश कुमार की बात केसी के ही मुँह से निकला करती थी. पत्रकारों को कोई संशय होता था तो वे केसी को ही फोन लगाते थे. दोस्त परस्त हैं केसी. 77 से ही हमलोगों की मुलाक़ात है. संसद के केंद्रीय हॉल में केसी कभी अकेले नहीं दिखाई देते थे. उनकी शेरों शायरी और पुराने क़िस्सों को सुनने के लिए दो चार लोग तो ज़रूर उनको घेरे रहते थे. सुनाने का उनका अंदाज़ भी ख़ास होता था.
उन्होंने कहा कि हम दोनों एक-दूसरे के प्रशंसक हैं. लेकिन नीतीश कुमार भी तो ख़ास ढाँचे में बने हुए हैं. हमको पार्टी से निकालना हुआ तो उसकी चिट्ठी केसी से ही निकलवाई. बचपन में कहावत सुनते थे. जो तेज होता था. अच्छा लिखता बोलता था तो वैसों के लिए एक मुहावरे का इस्तेमाल होता था. 'कलम तोड़ स्याही' पी जाना. ताकि दूसरा कोई वैसा नहीं लिख पाए. याद है एक मर्तबा केसी ने नीतीश जी के लिए कहा था ""जैसे हवा को कोई मुट्ठी में बंद नहीं कर सकता, जैसे फूलों की सुगंध को कोई फैलने से नहीं रोक सकता, वैसे ही नीतीश कुमार के सुशासन और उनके विचारों की गूंज को बिहार की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।" मैंने इसको नोट कर लिया था.
शिवानंद ने कहा कि यह उन दिनों की बात है जब नीतीश कुमार की क़ाबिलियत प्रधानमंत्री के रूप में दर्शाई जा रही थी. इसलिए केसी के उस लाजवाब कसीदे पर ताली बजी थी. लेकिन भारत रत्न वाली बात हज़म नहीं हुई. पता नहीं क्यों आज के दिन नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की बात केसी ने क्यों उठाई ? कहीं नीतीश जी को भारत रत्न का पात्र बता कर केसी त्यागी ने उन पर व्यंग्य तो नहीं किया है ! यह तो वही बता सकते हैं. लेकिन केसी के लिए जिस दुरदुराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया वह मुझे अच्छा नहीं लगा.