Bihar coaching rule: बिहार में कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार कोचिंग सेंटरों की गतिविधियों को नियंत्रित करने और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नया कानून लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद कोचिंग संस्थानों की मनमानी, भ्रामक प्रचार और अव्यवस्थित संचालन पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी।
शिक्षा विभाग की ओर से तैयार किए जा रहे मसौदे के अनुसार, "बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2026" लाया जाएगा। इस कानून के तहत कोचिंग संस्थानों के लिए स्पष्ट नियम और मानक निर्धारित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य छात्रों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
यह फैसला राजधानी पटना में एक चर्चित कोचिंग संस्थान में हुई तोड़फोड़ और विवाद की घटना के बाद तेजी से आगे बढ़ाया गया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रस्तावित कानून के तहत कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों में छात्रों को गुमराह करने वाले दावे नहीं कर सकेंगे। सफलता की गारंटी, निश्चित चयन, टॉप रैंक दिलाने जैसे दावों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यदि कोई संस्थान भ्रामक विज्ञापन जारी करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
इसके अलावा छात्रों को प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग बैचों में बांटने की प्रथा पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। संस्थानों को अपने परिणामों का प्रचार-प्रसार करते समय पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी और किसी भी प्रकार के भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए जा सकेंगे।
नए नियमों में छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक कोचिंग संस्थान के लिए अग्निशमन सुरक्षा प्रमाणपत्र, स्वच्छ पेयजल, अलग-अलग शौचालय, सीसीटीवी कैमरे, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था तथा दिव्यांग छात्रों के लिए अनुकूल सुविधाएं अनिवार्य होंगी। साथ ही प्रत्येक छात्र के लिए न्यूनतम स्थान का मानक भी तय किया जाएगा।
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार सभी कोचिंग संस्थानों को कानून लागू होने के तीन महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बिना संस्थान संचालित नहीं किए जा सकेंगे। छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए 24 घंटे सक्रिय शिकायत प्रणाली विकसित की जाएगी।
इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसके अध्यक्ष शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे। प्राधिकरण में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा कोचिंग संस्थानों और अभिभावकों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
राज्य स्तर के इस प्राधिकरण के साथ-साथ प्रत्येक जिले में जिला समिति का गठन किया जाएगा। ये समितियां कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण करेंगी और नियमों के पालन की निगरानी करेंगी। प्राधिकरण को रिकॉर्ड जांचने, निरीक्षण करने और शिकायतों की सुनवाई करने का अधिकार होगा। कई मामलों में उसे सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां भी प्रदान की जाएंगी।
छात्रों और अभिभावकों की सुविधा के लिए कॉल सेंटर तथा ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण, शिकायत और निगरानी से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं संचालित की जाएंगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोचिंग संस्थानों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा कई बार अनुचित गतिविधियों को जन्म देती है। सरकार किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेगी। पूरे मामले में पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए यह नया कानून महत्वपूर्ण साबित होगा।