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03-Feb-2026 11:52 AM
By First Bihar
Bihar Deputy CM : बिहार में पशुपालन और कृषि से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को लेकर राज्य सरकार ने एक नया दिशा-निर्देश जारी किया है। उपमुख्यमंत्री और कृषि विभाग के पूर्व मंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक और जनसंपर्क में ‘नीलगाय’ शब्द का प्रयोग न किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर ‘नील बकरी’ या ‘घोर पड़ास’ जैसे शब्दों का उपयोग किया जाए। उनका कहना है कि ‘गाय’ शब्द का प्रयोग इस संदर्भ में भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से अन्य अर्थों को जन्म दे सकता है, इसलिए इसे पूरी तरह से टाला जाना चाहिए।
विजय सिन्हा ने बताया कि यह मामला राज्य के लिए काफी संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि न केवल कृषि और पशुपालन विभाग, बल्कि सभी संबंधित विभागों को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा, “पूर्व समय भी इस पर कई बैठकें हुई थीं और इसे लेकर सुझाव दिए गए थे। वर्तमान कृषि मंत्री को भी इस मुद्दे से अवगत कराया गया है और उनसे कहा गया है कि इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू करें।”
उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक दस्तावेज, योजनाओं और मीडिया में ‘नीलगाय’ शब्द का प्रयोग न हो। इसके बजाय, ‘नील बकरी’ या ‘घोर पड़ास’ जैसे शब्दों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं है, बल्कि समाज और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शब्दों का चुनाव सामाजिक संवेदनाओं को प्रभावित करता है। बिहार में गाय और अन्य पालतू जानवरों को लेकर गहरी सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनाएँ हैं। किसी शब्द का गलत संदर्भ लोगों में भ्रम और असहमति पैदा कर सकता है। इसलिए उपमुख्यमंत्री के निर्देश का पालन करना सभी विभागों के लिए आवश्यक है।
मंत्री ने बताया कि ‘नीलगाय’ शब्द को अब से सभी रिपोर्टों, पत्राचार और मीडिया कम्युनिकेशन में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर तय शब्दावली का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि जनता तक इस बदलाव की जानकारी पहुंचाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
बिहार सरकार का यह निर्णय पशुपालन और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीलगाय वन्य जीवों की श्रेणी में आते हैं और उनका संरक्षण राज्य के लिए आवश्यक है। शब्दों के चयन से केवल सांस्कृतिक और भावनात्मक विवाद से बचा जा सकता है, बल्कि जनता में जागरूकता भी बढ़ाई जा सकती है।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अधिकारियों से कहा कि वे इस दिशा-निर्देश को गंभीरता से लें और सुनिश्चित करें कि सभी सरकारी दस्तावेज, योजनाएँ और विज्ञापन इस नए शब्दावली के अनुसार तैयार हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का ‘गाय’ शब्द का प्रयोग भविष्य में प्रशासनिक या सार्वजनिक संचार में स्वीकार्य नहीं होगा।
इस कदम को बिहार में प्रशासनिक सुधार और संवेदनशीलता के प्रति सजगता के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी विभाग इस दिशा-निर्देश के पालन के लिए सक्रिय हो चुके हैं और इसके लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
इस प्रकार, ‘नीलगाय’ शब्द के प्रयोग पर रोक और ‘नील बकरी’ या ‘घोर पड़ास’ शब्द का उपयोग एक स्पष्ट और संवेदनशील कदम के रूप में सामने आया है, जो बिहार में सांस्कृतिक और भावनात्मक संवेदनाओं का सम्मान करता है।