PATNA: महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। इसी बीच बिहार में एनडीए सरकार की नई कैबिनेट संरचना को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। महिला सशक्तिकरण के दावों के बीच राज्य सरकार में महिलाओं की सीमित भागीदारी विपक्ष के निशाने पर आ गई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कैबिनेट विस्तार के बाद बिहार सरकार के सभी मंत्रियों के बीच मंत्रालयों और विभागों का बंटवारा कर दिया है। जिसमें केवल 5 महिलाओं को ही मंत्री बनाया गया है। जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गयी है।
महिला आरक्षण बिल को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज रही है, लेकिन बिहार में NDA सरकार की कैबिनेट संरचना अब खुद सवालों के घेरे में है। राज्य में NDA गठबंधन के पास कुल 26 महिला विधायक हैं, जिनमें BJP की 10, JD(U) की 10, LJPRV की 3 और अन्य दलों की 3 विधायक शामिल हैं। इसके बावजूद 35 सदस्यीय सम्राट कैबिनेट में केवल 5 महिला विधायकों को मंत्री पद दिया गया है। यानी पूरी कैबिनेट में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 14.3 प्रतिशत रही।
आंकड़ों पर नजर डालें तो BJP ने अपनी 10 महिला विधायकों में से केवल 2 को मंत्री बनाया, जबकि JD(U) ने 10 में से 3 महिला विधायकों पर भरोसा जताया। कुल मिलाकर NDA की 26 महिला विधायकों में लगभग 80 प्रतिशत को मंत्री पद से वंचित रहना पड़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं, तब सत्ता संरचना में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में बिहार NDA सरकार की कैबिनेट संरचना विपक्ष को सवाल उठाने का अवसर दे रही है