Bihar News: बिहार में अब नदियों से निकाली जाने वाली गाद (सिल्ट) का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में बिहार सरकार और केंद्र सरकार के बीच समझौता हुआ है। इस पहल को 'नदी संजीवनी' नाम दिया गया है। योजना के तहत नदियों से गाद निकालकर उसका उपयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा। इससे नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सड़क परियोजनाओं की लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।





मंगलवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में इस योजना को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत बिहार की 27 सड़क परियोजनाओं में करीब 835 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। वहीं, फिलहाल निर्माणाधीन 16 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए 243 लाख घन मीटर गाद मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी।





केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस समझौते की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नदियों से निकाली गई उपयुक्त गाद का इस्तेमाल बिहार में बन रहे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा। इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपी जाएगी। प्राधिकरण आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से नदियों से गाद निकालने का काम करेगा। इसके बाद उपयुक्त गाद को सड़क निर्माण परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जाएगा।





इस पहल से एक साथ कई फायदे मिलने की उम्मीद है। नदियों से गाद निकलने पर उनकी जलधारण क्षमता और पानी के बहाव में सुधार हो सकता है। वहीं, सड़क निर्माण में गाद का इस्तेमाल होने से प्राकृतिक मिट्टी के दोहन को कम करने में मदद मिलेगी।




केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, नदियों से निकाली गई गाद का उपयोग सड़क निर्माण में करने से राजमार्ग परियोजनाओं की लागत कम हो सकती है। इसके अलावा निर्माण कार्यों में प्राकृतिक ऊपरी मिट्टी के इस्तेमाल को भी सीमित किया जा सकेगा। इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बाढ़ की समस्या से जुड़ी गाद को विकास कार्यों में उपयोगी बनाना है। इससे नदी प्रबंधन और आधारभूत संरचना के विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की योजना है।





केंद्रीय मंत्री की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, बिहार में फिलहाल NHAI की 39 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनकी कुल लंबाई करीब 1,561 किलोमीटर है और इन पर लगभग 58,340 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा राज्य में 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनकी अनुमानित लागत करीब 1,85,200 करोड़ रुपये बताई गई है। इन परियोजनाओं में भी नदियों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल करने की योजना है।




मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की कई नदियों में 10-10 मीटर तक गाद जमा हो गई है। इसकी वजह से नदियों में पानी के बहाव और जलधारण क्षमता पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अब नदियों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल बिहार में होने वाले निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इससे राज्य की आधारभूत संरचना से जुड़ी कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।




समझौते के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों को भी बिहार की इस नीति से प्रेरणा लेकर ऐसी योजनाएं शुरू करनी चाहिए। गडकरी के अनुसार, नदियों से निकलने वाली गाद का सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने से नदी पर्यावरण को बेहतर बनाने, राजमार्ग निर्माण की लागत घटाने और प्राकृतिक मिट्टी के दोहन को कम करने में मदद मिल सकती है।