Bihar Education News : बिहार में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार नए कदम उठाने की बात कह रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के मंत्रियों और विधायकों से एक खास संकल्प लेने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले एक से दो साल के भीतर राज्य के मंत्री और विधायक अपने बच्चों का नामांकन बिहार के मॉडल स्कूलों में कराएं। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ेंगे, तो इससे आम लोगों और दूसरे बच्चों का भी भरोसा बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे बदलावों और सरकार की योजनाओं को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बिहार के बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
मंत्रियों और विधायकों से मुख्यमंत्री की बड़ी अपील
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के मंत्रियों और विधायकों से अपील की कि वे अगले दो साल के भीतर अपने बच्चों का नामांकन बिहार के मॉडल स्कूलों में कराने का संकल्प लें। मुख्यमंत्री का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के बच्चे जब सरकारी मॉडल स्कूलों में पढ़ेंगे, तो इससे इन स्कूलों की विश्वसनीयता और बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे मॉडल स्कूल तैयार किए जा रहे हैं, जहां बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। सरकार चाहती है कि बिहार के बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए बाहर जाने की जरूरत न पड़े।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल स्कूलों के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों को बेहतर शिक्षक, आधुनिक संसाधन और प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप पढ़ाई भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
NEET और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के कई बच्चे मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि अभिभावक अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा और तैयारी का माहौल चाहते हैं।
सरकार की कोशिश है कि बिहार में ही ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जाए, जहां विद्यार्थियों को NEET और इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़े। मॉडल स्कूलों के जरिए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होती है, तो इससे न केवल गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य से शिक्षा के लिए होने वाला पलायन भी कम किया जा सकेगा।
15 अगस्त से पहले तैयार होगा ऑनलाइन पढ़ाई का ऐप
शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। उन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को निर्देश दिया है कि आगामी 15 अगस्त से पहले ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एक ऐप तैयार किया जाए। इस ऐप का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो किसी कारणवश बेहतर शिक्षकों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थी अच्छे शिक्षकों से जुड़कर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक, इस व्यवस्था के जरिए छात्र अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई कर सकेंगे। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर देर रात भी ऑनलाइन माध्यम से शिक्षकों से जुड़कर पढ़ाई जारी रखने की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
बिहार में शिक्षा व्यवस्था बदलने की तैयारी
राज्य सरकार का फोकस अब सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने पर भी है। मॉडल स्कूल और ऑनलाइन शिक्षा ऐप को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें बेहतर अवसर और सही शैक्षणिक माहौल देने की है। सरकार की कोशिश है कि राज्य के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बाहर जाने की मजबूरी न हो और उन्हें बिहार में ही बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा मिल सके।
अब आने वाले समय में मॉडल स्कूलों में दाखिले, सुविधाओं और शिक्षण व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी। वहीं 15 अगस्त से पहले प्रस्तावित ऑनलाइन पढ़ाई ऐप शुरू होने के बाद बिहार के उन छात्रों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों तक सीधे नहीं पहुंच पाते हैं।