Bihar News:  बिहार विधान परिषद चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने ऐसा सियासी उलटफेर किया है, जिसने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राजद ने भाजपा के दोनों मौजूदा विधान पार्षदों को हराकर दो अहम सीटों पर कब्जा जमा लिया। इन नतीजों से लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी का उत्साह बढ़ गया है। वहीं, भाजपा के लिए अपने मजबूत माने जाने वाले चुनावी क्षेत्रों में मिली हार किसी बड़े झटके से कम नहीं है।


इस बार के चुनाव में राजद की जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि जिन आठ सीटों पर चुनाव हुआ, उनमें पिछली बार पार्टी का एक भी विधान पार्षद नहीं था। ऐसे में दो सीटों पर जीत दर्ज करना राजद के लिए अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने का मौका है। खास बात यह है कि दोनों सीटों पर भाजपा के ऐसे उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा, जिनका अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अच्छा राजनीतिक आधार माना जाता था।


पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद के संजीव सिंह ने भाजपा के दिग्गज नेता नवल किशोर यादव को 1057 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। नवल किशोर यादव लगातार पांच बार इस सीट से जीत दर्ज कर चुके थे और करीब तीन दशक से इस निर्वाचन क्षेत्र में उनका दबदबा माना जाता था। ऐसे में उनकी हार ने पटना की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।


राजद के संजीव सिंह की जीत को पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वह पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में रह चुके हैं और खगड़िया जिले के परबत्ता से विधायक भी रहे हैं। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के मजबूत उम्मीदवार को हराकर विधान परिषद में अपनी जगह बनाई। पटना जैसी अहम सीट पर मिली जीत ने राजद को यह संदेश देने का मौका दिया है कि स्थानीय चुनावों में मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं।


पटना के बाद दरभंगा में भी राजद ने भाजपा को दूसरा बड़ा झटका दिया। दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम इस चुनाव के सबसे दिलचस्प नतीजों में शामिल रहा। यहां भाजपा के मौजूदा विधान पार्षद सर्वेश कुमार शुरुआत से बढ़त बनाए हुए थे। पहली वरीयता के मतों की गिनती में किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी मत नहीं मिले। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती शुरू हुई और मुकाबला अंतिम दौर तक पहुंच गया।


मतगणना के दौरान भाजपा उम्मीदवार की बढ़त बनी रही, लेकिन जीत के लिए जरूरी कोटा पूरा नहीं हो सका। इसके बाद आखिरी चरण में जन सुराज के उम्मीदवार मोहम्मद इम्तियाज को मिले दूसरी वरीयता के मतों की गिनती ने पूरा चुनावी गणित बदल दिया। राजद के अनिल झा ने अंतिम दौर में बाजी पलटते हुए भाजपा के सर्वेश कुमार को करीब 450 वोटों से हरा दिया। इस तरह दरभंगा की सीट पर भी भाजपा को अपनी मौजूदा सीट गंवानी पड़ी।


दरभंगा का परिणाम राजद के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि आखिरी समय तक मुकाबले में भाजपा उम्मीदवार की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही थी। लेकिन वरीयता आधारित मतगणना के अंतिम चरण में आए नतीजों ने चुनाव की तस्वीर बदल दी। इस जीत ने राजद कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया है और पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति पर भरोसा मजबूत करने का अवसर दिया है।


दो सीटों पर जीत के बाद राजद ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने के मुद्दे को भी उठाया है। पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि बैलेट पेपर से होने वाले चुनावों में भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, यह पार्टी का राजनीतिक दावा है और चुनाव परिणामों के आधार पर ही व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित होगा।


इन चुनावों में विपक्षी महागठबंधन के भीतर भी आपसी खींचतान देखने को मिली। राजद और कांग्रेस ने पांच सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे। इसका असर भी चुनावी परिणामों पर पड़ा। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मौजूदा विधान पार्षद मदन मोहन झा को हार का सामना करना पड़ा, जबकि तिरहुत शिक्षक सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मौजूदा विधान पार्षद संजय सिंह भी अपनी सीट नहीं बचा सके।


ऐसे में राजद की दो सीटों पर जीत ने विपक्ष को कुछ राहत जरूर दी है। हालांकि, महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी और अलग-अलग सीटों पर हुई हार ने विपक्ष के सामने कई सवाल भी खड़े किए हैं।


कुल मिलाकर, बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है। पटना में करीब तीन दशक पुराने दबदबे का टूटना और दरभंगा में अंतिम दौर में पलटा मुकाबला राजद के लिए बड़ी कामयाबी है। लालू-तेजस्वी की पार्टी के सामने अब इस जीत को आगे की राजनीति में भुनाने की चुनौती होगी। वहीं, भाजपा को यह समझना होगा कि मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में आखिर मतदाताओं का रुख क्यों बदला। आने वाले चुनावों में इन नतीजों का असर कितना दिखाई देगा, इस पर सबकी नजर रहेगी।