Bihar MLC Election 2026 : बिहार में विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मंथन अंतिम दौर में पहुंच चुका है। सूत्रों के अनुसार गठबंधन में सीट शेयरिंग का संभावित फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है, जिसमें बीजेपी और जेडीयू बराबरी के आधार पर चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। वहीं सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है।
जानकारी के मुताबिक, एनडीए के अंदर बीजेपी को तीन और जेडीयू को तीन सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को एक सीट दिए जाने की चर्चा है, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के खाते में भी एक सीट जा सकती है। बची हुई सीट पर सहयोगी दलों के बीच अंतिम सहमति बननी बाकी बताई जा रही है। हालांकि सीट बंटवारे पर आधिकारिक घोषणा जल्द किए जाने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार उम्मीदवार चयन में जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन को खास प्राथमिकता दी जाएगी। एनडीए नेतृत्व चाहता है कि हर प्रमुख सामाजिक वर्ग को प्रतिनिधित्व मिले ताकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक संदेश मजबूत किया जा सके। इसी वजह से कई नए चेहरों को मौका मिलने की भी चर्चा तेज है।
दरअसल, 28 जून 2026 को बिहार विधान परिषद की 9 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत निर्धारित समय के भीतर इन सीटों पर चुनाव कराना अनिवार्य है। ऐसे में चुनाव आयोग भी जल्द अधिसूचना जारी कर सकता है। माना जा रहा है कि मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के मौजूदा गणित को देखें तो विधान परिषद चुनाव में एनडीए की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। परिषद की एक सीट जीतने के लिए लगभग 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। वर्तमान संख्या बल के आधार पर एनडीए आसानी से आठ सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है, जबकि एक सीट महागठबंधन खासकर आरजेडी के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है।
इधर, नियमित चुनावों के अलावा एक सीट पर उपचुनाव भी होना है। यह सीट उस समय रिक्त हुई थी जब पूर्व मुख्यमंत्री एवं जेडीयू नेता Nitish Kumar राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके थे। इस कारण अब कुल मिलाकर 10 सीटों पर चुनाव की स्थिति बन गई है।
अगर वर्तमान सीटों के हिसाब से देखा जाए तो जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें अभी सबसे अधिक 5 सीटें जेडीयू के पास हैं। बीजेपी के खाते में 2 सीटें हैं, जबकि आरजेडी के पास भी 2 सीटें मौजूद हैं। एक सीट कांग्रेस के कब्जे में है। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद परिषद में दलों की ताकत में बदलाव देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि विधान परिषद चुनाव के जरिए सभी दल आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति का परीक्षण करेंगे। खासतौर पर एनडीए के लिए यह चुनाव संगठनात्मक एकजुटता दिखाने का मौका माना जा रहा है। वहीं महागठबंधन भी सीमित संख्या बल के बावजूद अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करेगा।
फिलहाल सभी दल संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन में जुटे हुए हैं। कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरों के नाम भी चर्चा में हैं। अब सबकी नजर चुनाव आयोग की अधिसूचना और एनडीए की आधिकारिक सीट शेयरिंग घोषणा पर टिकी हुई है।