पटना: बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नवंबर में रिक्त होने वाली इन सीटों पर चुनाव को लेकर संभावित प्रत्याशियों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। राजनीतिक दल भी मजबूत उम्मीदवारों की तलाश और संगठनात्मक रणनीति बनाने में जुट गए हैं। विधानसभा उपचुनाव के बाद विधान परिषद की ये सीटें बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर की अगली बड़ी परीक्षा मानी जा रही हैं।
इन चुनावों में सामान्य विधानसभा चुनाव की तुलना में मतदाताओं का दायरा अलग होता है। शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय मुद्दों पर पकड़ और संगठन की सक्रियता चुनावी परिणाम में अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि संभावित प्रत्याशी शिक्षक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, कर्मचारी संगठनों और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं।
नवंबर में चुनाव, दावेदारों ने बढ़ाई सक्रियता
विधान परिषद की इन आठ सीटों के चुनाव को लेकर अगले महीने चुनाव कार्यक्रम जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम भारत निर्वाचन आयोग की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। चुनाव की तारीख सामने आने से पहले ही कई संभावित उम्मीदवारों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। कुछ दावेदार लंबे समय से अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जबकि कई नए चेहरे भी शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे हैं। बैठकों, सामाजिक कार्यक्रमों और विभिन्न संगठनों के आयोजनों में उनकी सक्रियता बढ़ी है।
बिहार MLC चुनाव की 8 सीटों की पूरी लिस्ट
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
1. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
पटना शिक्षक सीट पर वर्तमान प्रतिनिधि के तौर पर नवल किशोर यादव (भाजपा) का नाम सामने है। इस क्षेत्र में शिक्षकों से जुड़े सेवा संबंधी मुद्दे, स्थानांतरण, पदोन्नति और वेतन प्रमुख चुनावी विषय हो सकते हैं।
2. तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
तिरहुत शिक्षक सीट का प्रतिनिधित्व संजय कुमार सिंह (भाकपा) कर रहे हैं। यहां शिक्षक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है और संभावित प्रत्याशी इन्हीं संगठनों के जरिए अपना आधार मजबूत करने में जुट सकते हैं।
3. दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
दरभंगा शिक्षक सीट से मदन मोहन झा (कांग्रेस) वर्तमान प्रतिनिधि हैं। मिथिलांचल क्षेत्र में शिक्षकों से जुड़े स्थानीय और सेवा संबंधी मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक समीकरण भी इस चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
4. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
सारण शिक्षक सीट पर अफाक अहमद (निर्दलीय) का प्रतिनिधित्व है। इस क्षेत्र में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों और मजबूत व्यक्तिगत जनसंपर्क वाले चेहरों के बीच मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
5. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
पटना स्नातक सीट का प्रतिनिधित्व नीरज कुमार (जदयू) कर रहे हैं। राजधानी क्षेत्र से जुड़ी इस सीट पर रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, उच्च शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
6. तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
तिरहुत स्नातक सीट से वंशीधर ब्रजवासी (निर्दलीय) वर्तमान प्रतिनिधि हैं। यहां स्नातक मतदाताओं के बीच रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ अहम होगी।
7. दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
दरभंगा स्नातक सीट का प्रतिनिधित्व सर्वेश कुमार (निर्दलीय) कर रहे हैं। इस क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा से जुड़े सवाल चुनावी चर्चा में रह सकते हैं।
8. कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
कोसी स्नातक सीट पर डॉ. एनके यादव (भाजपा) वर्तमान प्रतिनिधि हैं। कोसी क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के साथ युवाओं तथा स्नातक मतदाताओं से जुड़े मुद्दे चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
शिक्षक मतदाताओं पर रहेगा खास फोकस
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों का मुख्य फोकस शिक्षकों की समस्याओं पर रहने की उम्मीद है। सेवा शर्त, स्थानांतरण नीति, पदोन्नति, वेतन, पेंशन, विद्यालयों में संसाधन और शिक्षकों के कार्यभार जैसे मुद्दे लंबे समय से चुनावी विमर्श का हिस्सा रहे हैं। दावेदार शिक्षक संगठनों और शिक्षकों के छोटे-बड़े समूहों के साथ लगातार संपर्क बढ़ा रहे हैं। कई नेता सोशल मीडिया पर भी अपनी गतिविधियों और मुद्दों को प्रमुखता से सामने रख रहे हैं।
स्नातक सीटों पर रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं का मुद्दा सबसे अहम रह सकता है। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं, उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं और रोजगार की तलाश में लगे स्नातकों तक पहुंच बनाने के लिए संभावित उम्मीदवारों ने अभियान शुरू कर दिया है। राजनीतिक दल भी ऐसे उम्मीदवारों की तलाश में हैं, जिनकी युवाओं के बीच स्वीकार्यता के साथ-साथ क्षेत्र में मजबूत व्यक्तिगत पकड़ हो।
टिकट को लेकर दलों में मंथन
आठ सीटों पर चुनाव की आहट के साथ राजनीतिक दलों के भीतर टिकट को लेकर मंथन तेज हो गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी दल दोनों ही जीतने की क्षमता रखने वाले चेहरों पर नजर बनाए हुए हैं। इन चुनावों में केवल पार्टी का समर्थन पर्याप्त नहीं माना जाता। उम्मीदवार का व्यक्तिगत नेटवर्क, मतदाताओं से सीधा संपर्क और स्थानीय संगठनों में पकड़ भी काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में टिकट की घोषणा से पहले ही कई संभावित दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं।
उपचुनाव के बाद पहली बड़ी परीक्षा
विधानसभा उपचुनाव के बाद परिषद की ये आठ सीटें राजनीतिक दलों के लिए संगठन की ताकत परखने का मौका भी होंगी। उपचुनाव के नतीजों से मिले संकेतों के आधार पर दल अपनी रणनीति में बदलाव कर सकते हैं। आने वाले दिनों में टिकट को लेकर तस्वीर साफ होने के साथ इन आठ निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। फिलहाल पटना, तिरहुत, दरभंगा और सारण की शिक्षक सीटों तथा पटना, तिरहुत, दरभंगा और कोसी की स्नातक सीटों पर दावेदारों की सक्रियता ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।