Bihar MLC election 2026 : बिहार में कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) से जुड़े नेता दीपक प्रकाश को लेकर एक बड़ी चर्चा सामने आ रही है। माना जा रहा है कि आगामी बिहार विधान परिषद उपचुनाव के जरिए उन्हें एमएलसी बनाया जा सकता है। यह कदम राज्य की सियासत में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है, खासकर ऐसे समय में जब सरकार विस्तार की तैयारियों में जुटी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछली सरकार में दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य बने ही मंत्री पद पर रहे थे, जिसे लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए थे। ऐसे में अब उन्हें विधायिका का हिस्सा बनाने की कवायद तेज हो गई है, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।
दरअसल, यह सीट मंगल पांडे के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। मंगल पांडे के पद छोड़ने के बाद इस सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसके बाद राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट के लिए 23 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 2 मई तक नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी होगी, जबकि 4 मई तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे। यदि इस सीट पर एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो 12 मई को मतदान कराया जाएगा। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सत्तारूढ़ गठबंधन में सहमति बन गई, तो यह चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाए जाने का फैसला कई मायनों में अहम हो सकता है। एक तरफ यह आरएलएम और सत्ताधारी गठबंधन के बीच तालमेल को मजबूत करेगा, वहीं दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी। खासकर ऐसे समय में जब बिहार की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों का काफी महत्व है, यह फैसला रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, आगामी कैबिनेट विस्तार को देखते हुए भी यह कदम जरूरी माना जा रहा है। अगर दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया जाता है, तो उनके पास किसी सदन की सदस्यता होना आवश्यक होगा। ऐसे में विधान परिषद का रास्ता उनके लिए सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
हालांकि, अभी तक इस पूरे मामले में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब सभी की नजरें नामांकन प्रक्रिया और सत्तारूढ़ गठबंधन के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दीपक प्रकाश को वाकई इस सीट से एमएलसी बनाया जाता है या फिर कोई नया राजनीतिक मोड़ सामने आता है।