पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक क्षेत्र विकास योजना (विधायक फंड) को लेकर अहम चर्चा हुई। इस दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो अक्सर सदन में कम ही दिखाई देता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक इस मुद्दे पर एकजुट नजर आए। सभी दलों के जनप्रतिनिधियों ने विधायक क्षेत्र विकास योजना की राशि बढ़ाने की मांग करते हुए सरकार से अधिक अधिकार देने की अपील की। वहीं सरकार ने भी विधायकों को बड़ी राहत देते हुए योजना के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की।
योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने विधायक संजय कुमार के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए बताया कि अब विधायक अपने क्षेत्र में 25 लाख रुपये तक के विकास कार्य बिना टेंडर प्रक्रिया के करा सकेंगे। पहले यह सीमा 15 लाख रुपये थी। सरकार के इस फैसले से स्थानीय स्तर पर छोटे और मध्यम स्तर के विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने में आसानी होगी।
मंत्री ने कहा कि समय के साथ विकास कार्यों की जरूरतें बढ़ी हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन किया गया है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था से सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, पेयजल और अन्य स्थानीय विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होगी। इससे जनता को योजनाओं का लाभ पहले की तुलना में अधिक तेजी से मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में भी बदलाव
सदन में जवाब देते हुए मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के दायरे का भी विस्तार किया गया है। अब कई ऐसे कार्यों को भी योजना में शामिल किया गया है, जो पहले इसके दायरे से बाहर थे। उन्होंने कहा कि सरकार विधायक फंड को सांसद क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) की तर्ज पर अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि नई योजनाओं और संशोधित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी सभी विधायकों को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को बेहतर तरीके से लागू कर सकें।
विधायक फंड बढ़ाने की एकजुट मांग
सरकार की घोषणा के बाद सदन में विभिन्न दलों के विधायकों ने विधायक क्षेत्र विकास योजना की कुल राशि बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। विधायकों का कहना था कि वर्तमान में प्रत्येक विधायक को मिलने वाला 4 करोड़ रुपये का फंड महंगाई और बढ़ती विकास लागत को देखते हुए पर्याप्त नहीं रह गया है।
सदन में दो दर्जन से अधिक विधायकों ने एक स्वर में मांग की कि विधायक फंड को बढ़ाकर 6 करोड़ से 8 करोड़ रुपये किया जाए। उनका कहना था कि निर्माण सामग्री, सीमेंट, सरिया, डीजल, मजदूरी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मौजूदा राशि से सभी आवश्यक विकास कार्यों को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है।
विधायकों ने कहा कि जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं और हर क्षेत्र में सड़क, पुलिया, सामुदायिक भवन, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कार्यों की मांग रहती है। यदि फंड की राशि बढ़ाई जाती है तो विकास कार्यों को और गति मिलेगी।
अतिरिक्त अधिकार देने की भी मांग
सिर्फ फंड बढ़ाने तक ही चर्चा सीमित नहीं रही। विधायकों ने सांसदों की तर्ज पर कई अतिरिक्त अधिकार देने की भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि विधायक क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत सीसीटीवी कैमरे लगाने, सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने, एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा शव वाहन की अनुशंसा करने जैसे कार्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
विधायकों का तर्क था कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं से सबसे अधिक परिचित होते हैं। इसलिए यदि उन्हें अधिक अधिकार दिए जाएंगे तो वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार तेजी से निर्णय लेकर जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकेंगे।
सत्ता और विपक्ष एक मंच पर
बिहार विधानसभा में अक्सर राजनीतिक मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिलती है, लेकिन विधायक फंड के मुद्दे पर तस्वीर अलग रही। इस विषय पर लगभग सभी दलों के विधायक एकमत दिखाई दिए। सभी ने सरकार से विधायक फंड की राशि बढ़ाने और जनप्रतिनिधियों को अधिक अधिकार देने की मांग की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा सीधे तौर पर क्षेत्रीय विकास और जनता की सुविधाओं से जुड़ा है। इसलिए सत्ता और विपक्ष दोनों ने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक जैसी राय रखी।
सरकार के अगले कदम पर नजर
सरकार ने बिना टेंडर विकास कार्यों की सीमा 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का फैसला लेकर विधायकों को बड़ी राहत दी है। साथ ही मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में भी कई नए कार्यों को शामिल करने की घोषणा की गई है।अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार विधायक फंड की कुल राशि बढ़ाने और अतिरिक्त अधिकार देने की मांग पर क्या निर्णय लेती है। यदि इन मांगों को भी मंजूरी मिलती है, तो आने वाले समय में बिहार के विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार और तेज हो सकती है। इतना तय है कि विधायक क्षेत्र विकास योजना को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम जरूर उठा दिया है।