Bihar Student Protest :  बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम चरण के बीच छात्रों के आंदोलन, विधायकों पर हुए हमले और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को लेकर बिहार सरकार की ओर से ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बड़ा बयान दिया है। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी समस्या का समाधान हिंसा या सड़क पर टकराव से नहीं, बल्कि सदन में चर्चा के माध्यम से होना चाहिए।

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सरकार छात्रों की भावनाओं और उनकी परेशानियों को अच्छी तरह समझती है। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा छात्रों की बात सुनने और उनका समाधान निकालने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए छात्रों को आगे कर रहे हैं और स्वयं पीछे रहकर आंदोलन को दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "विद्यार्थियों के प्रति हम लोगों की काफी संवेदना है। विद्यार्थियों के साथ जो कुछ भी हो रहा है, उससे हम सभी लोग मर्माहत हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक दलों के नेता बैकग्राउंड में रहकर विद्यार्थियों को आगे कर इस तरह की गतिविधियां करा रहे हैं।"

"सदन चल रहा है तो मुद्दा वहीं उठना चाहिए"

मंत्री ने कहा कि जब संसद और विधानसभा दोनों की कार्यवाही चल रही है तो किसी भी जनहित के मुद्दे को लोकतांत्रिक तरीके से सदन में उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और हर मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।उन्होंने कहा, "प्रदर्शन और धरना से हर समस्या का समाधान नहीं होता। जब लोकसभा और विधानसभा दोनों चल रही हैं तो किसी भी विषय को सदन में उठाना चाहिए। सरकार सुनने के लिए भी तैयार है और जवाब देने के लिए भी तत्पर है।" श्रवण कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ा माध्यम है और सरकार इसी प्रक्रिया में विश्वास रखती है।

विधायक और पत्रकारों पर हमले को लेकर जताई चिंता

हाल के दिनों में आंदोलन के दौरान विधायकों और पत्रकारों पर हुए हमलों को लेकर भी मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग विधायकों पर हमला कर रहे हैं, उन्हें केवल छात्र कहना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाओं के पीछे राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता सक्रिय हो सकते हैं। मंत्री ने कहा, "अब आप खुद देखिए कि विधायकों पर हमला हो रहा है। विधायकों पर हमला करने वाले विद्यार्थी नहीं हो सकते। इसके पीछे राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता हैं। पत्रकारों पर भी हमले हुए हैं और उन्हें भी चोटें आई हैं। इस तरह की घटनाओं से समाज आगे नहीं बढ़ सकता।"उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। जनप्रतिनिधियों और मीडिया कर्मियों पर हमला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

जांच में सच सामने आएगा

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और किसी निर्दोष को फंसाया भी नहीं जाएगा।उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की नीति हमेशा से स्पष्ट रही है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं। उन्होंने कहा, "बिहार की वर्तमान सरकार में और पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में भी यही परंपरा रही है कि न किसी को फंसाया जाता है और न किसी को बचाया जाता है। बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।"

विपक्ष पर साधा निशाना

श्रवण कुमार के बयान को छात्रों के आंदोलन और विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार की ओर से बड़ा राजनीतिक जवाब माना जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों की वास्तविक समस्याओं को समाधान की दिशा में ले जाने के बजाय आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करती है और हर वैध मांग पर विचार करने के लिए तैयार है, लेकिन हिंसा और टकराव का रास्ता किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

विधानसभा के बाहर दिया गया यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलन, विपक्ष के विरोध और सदन के भीतर-बाहर जारी राजनीतिक बयानबाजी ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। अब सभी की निगाहें जांच की रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।