Bihar Mining :  बिहार में बालू, पत्थर और अन्य विशिष्ट लघु खनिजों के खनिज पट्टों की बंदोबस्ती को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने बिहार खनिज नियमावली, 2019 में दूसरा संशोधन करते हुए एक व्यक्ति के नाम पर राज्यभर में खनिज पट्टों की अधिकतम सीमा तय कर दी है। अब कोई भी व्यक्ति बिहार में अलग-अलग जिलों में मिलाकर कुल 200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल का खनिज पट्टा अपने नाम पर नहीं रख सकेगा। सरकार के इस फैसले को खनन क्षेत्र में पट्टों के अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था का असर बालू, पत्थर और अन्य विशिष्ट लघु खनिजों की बंदोबस्ती पर पड़ेगा।

अलग-अलग जिलों के पट्टे भी होंगे सीमा में शामिल

संशोधित नियम की सबसे अहम बात यह है कि 200 हेक्टेयर की सीमा किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहेगी। यदि किसी व्यक्ति के पास राज्य के अलग-अलग जिलों में खनिज पट्टे हैं तो सभी पट्टों का क्षेत्रफल जोड़कर कुल सीमा निर्धारित की जाएगी।

यानी कोई व्यक्ति एक जिले में 100 हेक्टेयर, दूसरे जिले में 70 हेक्टेयर और तीसरे जिले में 30 हेक्टेयर का पट्टा रखता है तो कुल क्षेत्रफल 200 हेक्टेयर माना जाएगा। इसके बाद वह नए खनिज पट्टे के जरिए निर्धारित सीमा से आगे नहीं बढ़ सकेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खनिज संसाधनों पर कुछ चुनिंदा लोगों या समूहों का अत्यधिक नियंत्रण न हो और बंदोबस्ती प्रक्रिया में अधिक लोगों को अवसर मिल सके।

पत्थर खदानों के भूखंडों को जोड़ने और बांटने की अनुमति

सरकार ने पत्थर खदानों की बंदोबस्ती को लेकर भी नियमों में बदलाव किया है। अब आवश्यकता के अनुसार खनन क्षेत्र के भूखंडों को आपस में जोड़ा जा सकेगा। वहीं जरूरत पड़ने पर बड़े भूखंडों को छोटे-छोटे खंडों में बांटकर उनकी बंदोबस्ती भी की जा सकेगी। इस बदलाव से खनन क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और जरूरत के अनुसार बंदोबस्ती की प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का जोर खनिज संसाधनों के व्यवस्थित इस्तेमाल के साथ पारदर्शी बंदोबस्ती व्यवस्था विकसित करने पर है।

नीलामी जीतने के बाद पांच दिन में जमा करनी होगी 25 प्रतिशत राशि

संशोधित नियमावली में नीलामी प्रक्रिया से जुड़े वित्तीय प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। सफल उच्चतम बोलीदाता को नीलामी की राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा पांच कार्य दिवस के भीतर जमा करना होगा। इस प्रावधान का उद्देश्य नीलामी प्रक्रिया में गंभीर बोलीदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना और प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान में अनावश्यक देरी को रोकना है। संशोधन के बाद खान एवं भू-तत्व विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत आदेश भी जारी किया गया है।

असफल बोलीदाता को 10 दिन में वापस होगी अग्रधन राशि

नीलामी में असफल रहने वाले बोलीदाताओं के लिए भी नियम में स्पष्ट व्यवस्था की गई है। विभाग को असफल बोलीदाता की अग्रधन राशि अधिकतम 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। वहीं, प्रतिभूति राशि पट्टा अवधि समाप्त होने के बाद वापस की जाएगी। हालांकि इसके लिए यह जरूरी होगा कि संबंधित पट्टाधारक किसी भुगतान का डिफाल्टर न हो। इस व्यवस्था से नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने वाले लोगों और कंपनियों की जमा राशि लंबे समय तक अटके रहने की समस्या कम हो सकती है।

पट्टा क्षेत्र से दो किलोमीटर तक क्रशर लगाने की अनुमति

बिहार में खनन से जुड़े कारोबारियों के लिए क्रशर स्थापना के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब पट्टाधारक अपने पट्टा क्षेत्र की सीमा से अधिकतम दो किलोमीटर की परिधि में मोबाइल क्रशर सहित क्रशर स्थापित कर सकेंगे।हालांकि क्रशर लगाने के लिए विभाग की ओर से निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। इससे खनन स्थल से निकाले गए पत्थर को प्रसंस्करण के लिए दूर ले जाने की आवश्यकता कम हो सकती है और खनन से जुड़े कामकाज को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।

निर्माण स्थल के पास भी लग सकेगा क्रशर

नियमावली में निर्माण परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। अब निर्माण स्थल से 500 मीटर की परिधि में निर्माण कार्य से सीधे जुड़े संवेदक को भी क्रशर लगाने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके लिए संबंधित कार्य विभाग की अनुशंसा आवश्यक होगी। यानी निर्माण परियोजना से जुड़े ठेकेदार को निर्धारित प्रक्रिया और विभागीय शर्तों के तहत निर्माण स्थल के नजदीक क्रशर स्थापित करने का रास्ता मिलेगा।

अवैध खनन पर नियंत्रण की कोशिश

बिहार में बालू और पत्थर खनन लंबे समय से प्रशासन और सरकार के लिए चुनौती रहा है। अवैध खनन, परिवहन और भंडारण को लेकर समय-समय पर कार्रवाई होती रही है। ऐसे में खनिज पट्टों की अधिकतम सीमा तय करने और बंदोबस्ती प्रक्रिया में बदलाव को सरकार की खनन व्यवस्था को अधिक नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नई व्यवस्था से एक तरफ जहां बड़े पैमाने पर पट्टों के केंद्रीकरण पर रोक लगाने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी तरफ नीलामी, भुगतान, क्रशर स्थापना और पट्टों के प्रबंधन से जुड़े नियम भी पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट होंगे।

कुल मिलाकर बिहार सरकार का यह संशोधन खनिज संसाधनों की बंदोबस्ती से लेकर उनके इस्तेमाल तक कई स्तरों पर असर डाल सकता है। खासकर बालू और पत्थर के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए 200 हेक्टेयर की अधिकतम सीमा सबसे बड़ा बदलाव है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद खनिज पट्टों की बंदोबस्ती में कितनी पारदर्शिता आती है और इसका राज्य के खनन कारोबार पर क्या प्रभाव पड़ता है।