Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में दूध उत्पादन को लेकर बड़ा लक्ष्य तय किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सहकारी संगठन ‘सुधा डेयरी प्रोजेक्ट’ के माध्यम से दूध उत्पादन को वर्तमान 40 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर सवा करोड़ लीटर प्रतिदिन किया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनकल्याण है और किसानों तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने महिला पशुपालकों को प्राथमिकता देते हुए उन्नत नस्ल की गाय, भैंस और बकरी उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।


रविवार को लोक सेवक आवास में आयोजित डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कॉम्फेड के माध्यम से राज्य के पशुपालकों तक बेहतर नस्ल के पशु पहुंचाने पर जोर दिया।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिहार में दूध उत्पादन को तीन गुना तक बढ़ाने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें बढ़ावा देने की जरूरत है।


मुख्यमंत्री ने बिहार के मत्स्य पालकों की मछलियों को नेपाल और सीमावर्ती राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही उन्होंने मछली उत्पादन को वर्तमान 9 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य दिया।


बैठक में विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने विभिन्न योजनाओं और भविष्य की कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, सचिव लोकेश कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह और सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।


इसी बीच 21वीं पशुगणना रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि बिहार में पिछले छह वर्षों में दुधारू पशुओं की संख्या में करीब 10 प्रतिशत तक कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में गायों की संख्या में 2.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।


हालांकि राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन दुधारू पशुओं की घटती संख्या चिंता का विषय बन गई है। इससे पहले वर्ष 2019 की पशुगणना में गाय, भैंस और बकरी की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार तीनों श्रेणियों में गिरावट देखी गई है।


विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण किसानों का पशुपालन से मोहभंग हो रहा है। अब गांवों में पहले की तरह हर घर में गाय-भैंस नजर नहीं आती। बिहार पशु चिकित्सा संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीरेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि दुधारू पशुओं की संख्या में कमी राज्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोग अब देसी नस्लों की जगह जर्सी और फ्रीजियन गायों को अधिक पाल रहे हैं, इसलिए सरकार को पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चलानी चाहिए।