Bihar Migration : बिहार में लगातार हो रहे पलायन को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार से पलायन को पूरी तरह रोकने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग लगाने होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से बेहतर करने के लिए यदि कोई व्यक्ति बिहार से बाहर जाता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन गरीब और मजबूर लोगों का रोजगार की तलाश में पलायन चिंता का विषय है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के भौगोलिक हालात और पलायन के बीच के संबंध को भी समझाया। उन्होंने कहा कि बिहार का नक्शा देखने से साफ पता चलता है कि राज्य की भौगोलिक स्थिति काफी अलग है। बिहार का एक हिस्सा पहाड़ी और सूखे की समस्या से प्रभावित होता है, जबकि दूसरे हिस्से में पानी की अधिकता रहती है। ऐसे में राज्य को बाढ़ और सूखे दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

बिहार को अपने पानी से नहीं, नेपाल के पानी से ज्यादा दिक्कत

सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या का एक बड़ा कारण नेपाल में होने वाली बारिश है। नेपाल में जब भारी बारिश होती है तो उसका असर बिहार के मैदानी इलाकों में देखने को मिलता है और कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को कई बार अपने पानी से उतनी समस्या नहीं होती, जितनी नेपाल से आने वाले पानी से होती है। राज्य की नदियों और उसकी भौगोलिक स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। बिहार में बाढ़ और जल प्रबंधन का मुद्दा लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। हर साल मानसून के दौरान नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर सीमावर्ती जिलों के साथ-साथ राज्य के बड़े हिस्से पर पड़ता है।

CM बोले- बिहार में अब घट रहा है पलायन

पलायन को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दावा किया कि बिहार से पलायन की दर अब कम हो रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में जन वितरण प्रणाली यानी पीडीएस से जुड़े रिकॉर्ड को देखा है। इसी दौरान वन नेशन वन राशन कार्ड व्यवस्था के तहत दूसरे राज्यों में राशन लेने वाले बिहार के लोगों के आंकड़ों का भी उन्होंने उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, मौजूदा समय में करीब 6 लाख लोग ऐसे हैं, जो बिहार से दूसरे राज्यों में जाकर राशन ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसमें एक-दो लाख लोगों को और जोड़ भी दिया जाए, तब भी यह संख्या बहुत अधिक नहीं है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हर तरह के पलायन को एक नजर से नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, जो लोग आर्थिक रूप से बेहतर अवसरों की तलाश में बिहार से बाहर जा रहे हैं और वहां काम कर रहे हैं, उनका बाहर जाना गलत नहीं है।

रोजगार के लिए बाहर जाना गलत नहीं, मजबूरी का पलायन चिंता की बात

सम्राट चौधरी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने, बेहतर नौकरी पाने या कारोबार के लिए बिहार से बाहर जाता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। इसे अवसर की तलाश के तौर पर देखा जाना चाहिए।

लेकिन गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोगों का सिर्फ रोजगार की कमी के कारण मजबूरी में दूसरे राज्यों में जाना गंभीर विषय है। सरकार के सामने चुनौती यही है कि बिहार में ही ऐसे अवसर पैदा किए जाएं, जिससे लोगों को अपने परिवार और गांव-समाज को छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी न हो।

'पलायन रोकना है तो बिहार में लगानी होगी इंडस्ट्री'

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पलायन की समस्या का सीधा समाधान उद्योगों को बताया। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में लगातार उद्योग लगाए जाएंगे और रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा होंगे, तभी पलायन को प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि बड़े पैमाने पर लोग रोजगार की तलाश में बाहर जाते हैं तो इसमें मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्या की आशंका भी पैदा हो सकती है। ऐसे में सरकार को रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षित आवाजाही और श्रमिकों के हितों पर भी ध्यान देना होगा।

मुख्यमंत्री का संदेश साफ है कि बिहार में रोजगार और उद्योग का विस्तार पलायन की समस्या से निपटने की कुंजी है। सरकार यदि राज्य में निवेश बढ़ाने, औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में सफल होती है, तो आने वाले समय में मजबूरी में होने वाले पलायन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बाढ़, पलायन और उद्योग—तीनों पर फोकस

सम्राट चौधरी के बयान में बिहार की तीन बड़ी चुनौतियां एक साथ दिखाई देती हैं—बाढ़, पलायन और रोजगार। एक तरफ नेपाल से आने वाले पानी के कारण हर साल बाढ़ की समस्या खड़ी होती है, तो दूसरी तरफ रोजगार के पर्याप्त अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग बाहर जाते हैं।

ऐसे में बिहार के लिए केवल पलायन रोकना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए राज्य में उद्योग, निवेश, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का ऐसा नेटवर्क तैयार करना होगा, जिससे बिहार के युवाओं और श्रमिकों को अपने ही राज्य में बेहतर अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि सरकार आने वाले समय में औद्योगिकीकरण को पलायन रोकने की रणनीति का अहम हिस्सा बनाने पर जोर दे रही है।