Bihar Mahila Rojgar Yojana : बिहार की राजनीति में महिला रोजगार योजना को लेकर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। ग्रामीण विकास मंत्री Shravan Kumar ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने को लेकर कई बड़े दावे किए हैं, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। सरकार जहां इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनाव से पहले जनता को लुभाने वाली रणनीति करार दे रहा है।
मंत्री ने कहा कि महिला रोजगार योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को दूसरी किस्त के रूप में दो लाख रुपये की राशि इसी महीने उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके साथ ही तीसरी किस्त के तौर पर 40 हजार रुपये, चौथी किस्त में 60 हजार रुपये और पांचवीं किस्त में 80 हजार रुपये देने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने का दावा किया गया है। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और छोटे स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
योजना को लेकर बढ़ते सवालों पर मंत्री ने विपक्ष के नेता Tejashwi Yadav पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार चरणबद्ध तरीके से अपने वादों को पूरा कर रही है। मंत्री ने दावा किया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है और योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
इस दौरान मंत्री ने शहरी महिलाओं को लेकर भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि आजीविका दीदी योजना से जुड़ी करीब 18 लाख महिलाओं के आवेदन की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आने वाले दिनों में इन महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं को रोजगार शुरू करने में मदद मिलेगी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी चर्चा में रहा। जातिगत एन्काउंटर को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि अपराध का कोई धर्म या जाति नहीं होती। अपराधी सिर्फ अपराधी होता है और पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना है और किसी भी तरह के अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजनीति पर बोलते हुए मंत्री ने कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जिससे देश की छवि पर असर पड़े। मंत्री ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों को भी खारिज किया और कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। उन्होंने साफ कहा कि ईवीएम या बैलेट पेपर को लेकर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं और चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ कराए जाते हैं।
महिला रोजगार योजना को लेकर हो रही इन बड़ी घोषणाओं के बाद बिहार की राजनीति में बहस और तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे महिलाओं के आर्थिक उत्थान का बड़ा अभियान बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे महज चुनावी वादा करार दे रहा है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार द्वारा घोषित ये आर्थिक सहायता वास्तव में महिलाओं तक पहुंचती है या फिर यह सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रह जाती है।