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08-Feb-2026 07:50 AM
By First Bihar
Bihar Pink Bus Scheme : बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई और प्रेरणादायक पहल देखने को मिल रही है। जल्द ही राज्य की महादलित महिलाएं पिंक बसों की स्टेयरिंग संभालती नजर आएंगी। इस पहल का उद्देश्य न केवल महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में महिला यात्रियों की सुरक्षा और भरोसे को भी मजबूत करना है। परिवहन विभाग ने इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
पहले चरण में छह महादलित महिलाओं का चयन पिंक बस चलाने के लिए किया गया है। चयनित महिलाओं में आरती कुमारी, रागिनी कुमारी, अनीता कुमारी, सरस्वती कुमारी, गायत्री कुमारी और बेबी कुमारी शामिल हैं। इन सभी महिलाओं के पास हेवी मोटर व्हीकल (एचएमवी/एलएमवी) ड्राइविंग लाइसेंस पहले से मौजूद है, जिसके आधार पर इन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए चुना गया है। परिवहन विभाग इन सभी को औरंगाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आईडीटीआर) में विशेष प्रशिक्षण दे रहा है। इस प्रशिक्षण में बस संचालन, यातायात नियम, सड़क सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये सभी महिलाएं पटना की सड़कों पर पिंक बस चलाती दिखाई देंगी। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार आगामी 14 फरवरी को पटना स्थित अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यक्रम में इन महिलाओं का औपचारिक नियोजन करेंगे। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ राज्य में सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
बीएसआरटीसी के मुताबिक, केवल छह महिलाएं ही नहीं बल्कि आईडीटीआर में 13 अन्य महिला चालक भी हेवी मोटर व्हीकल का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। आने वाले समय में इन महिलाओं को भी बस संचालन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। फिलहाल राज्य में संचालित 100 पिंक बसों में पहले से ही महिला कंडक्टर तैनात हैं, जो महिला यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा देती हैं। अब महिला ड्राइवरों की नियुक्ति से यह सेवा पूरी तरह महिला केंद्रित हो जाएगी।
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने इस पहल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनका मानना है कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और उन्हें अवसर देने की जरूरत है। मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में ड्राइविंग प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए सुपौल, बांका, मोतिहारी और नालंदा जिलों में भी आईडीटीआर स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
इन नए प्रशिक्षण केंद्रों के शुरू होने से राज्य के अधिक से अधिक युवाओं और महिलाओं को पेशेवर ड्राइविंग का प्रशिक्षण मिल सकेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं सामाजिक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। महादलित महिलाओं का पिंक बसों की स्टेयरिंग संभालना न केवल महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा, बल्कि समाज में लैंगिक समानता का भी मजबूत संदेश देगा।