पटना/गोपालगंज: बिहार में शराबबंदी के दौरान जब्त शराब की नीलामी से जुड़े कथित घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में एक तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच के दायरे में गोपालगंज के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, नीलामी समिति के सदस्य और नीलामी प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोग भी हैं। आर्थिक अपराध इकाई इस पूरे मामले में दस्तावेजों, नीलामी की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
इस मामले में गिरफ्तार पुलिस पदाधिकारी की पहचान राजेन्द्र राम के रूप में हुई है। वह सिधवलिया थाना कांड संख्या 125/2020 के तत्कालीन अनुसंधानकर्ता थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इसके अलावा गोपालगंज जिला परिवहन कार्यालय में पहले काम कर चुके एक लिपिक और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को भी इस मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ था केस
आर्थिक अपराध इकाई के मुताबिक, इस मामले की जांच पटना हाई कोर्ट में दायर सिविल रिट याचिका (C.W.J.C. No. 4697/2025) में 4 नवंबर 2025 को पारित आदेश के आलोक में शुरू हुई। याचिकाकर्ता राधेश्याम सिंह, पिता स्वर्गीय गणेश सिंह, रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के खरहरी गांव के निवासी हैं।
उनकी याचिका के आधार पर आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 42/2025 दर्ज किया गया। यह प्राथमिकी 20 नवंबर 2025 को दर्ज की गई थी। मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के साथ बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा 52 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
प्राथमिकी में गोपालगंज के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, नीलामी समिति के सदस्य, बोली लगाने वाले रियाजुल आलम और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच का केंद्र शराब की नीलामी से जुड़ी कथित अनियमितताएं हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा गिरफ्तार
आर्थिक अपराध इकाई ने मामले के अनुसंधान के दौरान पुलिस अवर निरीक्षक राजेन्द्र राम को 8 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया। उनकी उम्र करीब 59 वर्ष बताई गई है। वह झारखंड के पलामू जिले के नगर थाना क्षेत्र के सुढ़ना गांव के रहने वाले हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजेन्द्र राम सिधवलिया थाना कांड संख्या 125/2020 में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता थे। गिरफ्तारी के समय वह रोहतास जिले के बघैला थाना में पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर पदस्थापित थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस गिरफ्तारी के बाद मामले में पुलिस अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। हालांकि, आर्थिक अपराध इकाई की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में राजेन्द्र राम के खिलाफ लगाए गए आरोपों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। ऐसे में उनकी भूमिका और कथित अनियमितताओं में उनकी संलिप्तता का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
परिवहन कार्यालय के दो पूर्व कर्मी भी जेल भेजे गए
इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने 14 सितंबर 2026 को दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें कन्हैया लाल और हैदर अली अंसारी शामिल हैं। कन्हैया लाल गोपालगंज जिला परिवहन कार्यालय में तत्कालीन लिपिक के पद पर कार्यरत थे। वह पटना जिले के बेऊर थाना क्षेत्र के सिपाराडीह के निवासी हैं। वहीं, हैदर अली अंसारी गोपालगंज जिला परिवहन कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। वह सीवान जिले के महादेवा थाना क्षेत्र के दरीगा हाता के निवासी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गिरफ्तारी के समय हैदर अली अंसारी पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित जिला परिवहन कार्यालय में पदस्थापित थे। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। आर्थिक अपराध इकाई मामले में उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
नीलामी प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका पर नजर
गोपालगंज में शराब की नीलामी से जुड़े इस मामले में तत्कालीन उत्पाद विभाग के अधिकारियों, नीलामी समिति के सदस्यों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्राथमिकी में धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। आर्थिक अपराध इकाई अब मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। तीन गिरफ्तारियों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में नीलामी प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं से जुड़े और कौन से तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल, इस मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित घोटाले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी और यह पता चलेगा कि नीलामी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी।