Bihar Land Reform : बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य में भूमि प्रबंधन, डिजिटलीकरण और प्रशासनिक सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों का दावा किया है। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान भूमि प्रशासन को पारदर्शी, डिजिटल और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में व्यापक कार्य किए गए हैं। विभाग के अनुसार भूमि उपलब्धता, विशेष सर्वेक्षण, दाखिल-खारिज, डिजिटलीकरण और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।


विभाग ने जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में राज्य की 28 केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय विकास परियोजनाओं के लिए 1380.59 एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध कराई गई है। इससे शिक्षा, सड़क, ऊर्जा, खेल, पर्यटन तथा औद्योगिक क्षेत्रों की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।


विभाग के अनुसार चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, केंद्रीय विद्यालय, दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल, सीआईएसएफ प्रशिक्षण केंद्र, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डेयरी संयंत्र तथा विभिन्न सड़क परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त लगभग 45,748 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चल रही है, जिससे करीब 30 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को लाभ मिलेगा।


भूमि सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण को लेकर भी विभाग ने बड़ी उपलब्धियां गिनाईं। सरकार द्वारा विशेष भू-सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम के लिए 863 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। कई जिलों में सर्वेक्षण का कार्य तेजी से जारी है।


राजस्व विभाग ने बताया कि राज्य में अब तक 1.52 लाख से अधिक राजस्व मानचित्रों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। करोड़ों भू-अभिलेखों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा कर उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को घर बैठे कई राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


दाखिल-खारिज मामलों के निपटारे में भी सुधार का दावा किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन किया गया। विभाग के अनुसार आवेदनों की अस्वीकृति दर में भी कमी आई है और डिजिटाइज्ड जमाबंदी तथा नियमित मॉनिटरिंग से सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।


राजस्व महाअभियान के तहत पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर आवेदन लिए जा रहे हैं। लाखों आवेदन प्राप्त होने के बाद उनकी स्कैनिंग और ऑनलाइन अपलोडिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जन शिकायत पोर्टल के माध्यम से शिकायतों के निपटारे की दर में भी वृद्धि हुई है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को तेज किया गया है और संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।


भूमि प्रशासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने चार नई नियमावलियां भी लागू की हैं। इनमें बेतिया राज संपत्ति नियमावली, बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026, बिहार काश्तकारी संशोधन नियमावली तथा विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नियमावली शामिल हैं। इन नियमों से भूमि प्रबंधन और सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाया जाएगा।


विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी दावा किया है। अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 144 आरोप पत्र प्राप्त हुए हैं। कई मामलों में स्पष्टीकरण मांगा गया है जबकि कई मामलों में विभागीय कार्रवाई जारी है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) सेल का गठन भी किया गया है।


इसके अलावा राज्य सरकार ने विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक मेलों के आयोजन के लिए करोड़ों रुपये की राशि उपलब्ध कराई है। राजगीर मलमास मेला, श्रावणी मेला, रामनवमी मेला सहित अन्य आयोजनों के लिए बजट स्वीकृत किया गया है। कुल मिलाकर विभाग का दावा है कि डिजिटल सेवाओं, विशेष सर्वेक्षण, भूमि प्रबंधन और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई के जरिए बिहार में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाया जा रहा है।