Bihar Bhumi: बिहार में जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज गलतियों से परेशान लोगों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। राज्य सरकार जमाबंदी में दर्ज खाता, खेसरा, प्लॉट नंबर और रैयत यानी जमीन मालिक के नाम से जुड़ी गड़बड़ियों को सुधारने के लिए 45 दिनों का विशेष महाअभियान शुरू करने जा रही है। सुधार के दौरान जरूरत पड़ने पर जमीन की मुफ्त मापी भी कराई जाएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि अभियान के दौरान जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज विभिन्न प्रकार की त्रुटियों को ठीक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक लोगों को छोटी-छोटी गलतियों के सुधार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब सरकार खुद लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करेगी।
शास्त्रीनगर में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने अंचल अधिकारियों (सीओ) और राजस्व अधिकारियों (आरओ) को लोगों से सीधे संवाद करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दफ्तर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उसके आवेदन की सही स्थिति की जानकारी दी जाए, ताकि अंचल कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सके। मंत्री ने अधिकारियों से कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने पर भी जोर दिया।
राज्य के अरवल, जहानाबाद, शेखपुरा, शिवहर और लखीसराय जिलों के एक हजार से अधिक गांवों में जल्द ही जमीन सर्वे का नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। सर्वे के नतीजों से असंतुष्ट लोगों को नोटिफिकेशन जारी होने के तीन महीने के भीतर एडीएम कोर्ट में अपील करने का अधिकार होगा। इसके लिए अलग से सर्वे अपील सेल भी बनाया जा रहा है।
जिन जिलों में नया जमीन सर्वे कराया जा रहा है, वहां स्पेशल म्यूटेशन की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके तहत जमीन के मालिकाना हक के साथ उसका नक्शा भी उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जमीन की पहचान स्पष्ट होगी और भविष्य में पड़ोसियों या रिश्तेदारों के बीच होने वाले सीमा विवादों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
राज्य सरकार सभी प्रकार की सरकारी जमीनों का एक बड़ा लैंड बैंक तैयार कर रही है। इसके तहत पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी जमीनों का मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा। सरकार के अनुसार, भविष्य में नई फैक्ट्रियों की स्थापना और विभिन्न विकास योजनाओं के लिए सरकारी जमीन से जुड़ा यह डेटा काफी उपयोगी साबित होगा।
अंचल कार्यालयों के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पटना स्थित मुख्यालय से रोजाना निगरानी की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की जा रही है।यह टीम विभिन्न जिलों में जमीन से जुड़े मामलों के निष्पादन की गुणवत्ता की जांच करेगी।
इससे फर्जी दस्तावेज, गलत म्यूटेशन और मृत जमीन मालिकों के उत्तराधिकार से जुड़े मामलों का तेजी से और सही तरीके से निपटारा करने में मदद मिलेगी। सरकार के इस 45 दिवसीय अभियान से जमाबंदी में दर्ज गलतियों को दूर करने के साथ-साथ जमीन के रिकॉर्ड को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।