Bihar Land Mafia : बिहार में जमीन कब्जाने और करोड़ों रुपये की जमीन की बंदरबांट का मामला अब पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया है। आरोप है कि राज्य के कुछ इलाकों में भूमि माफिया सरकारी अफसरों, पुलिसकर्मियों, स्थानीय नेताओं और दबंगों के साथ कथित गठजोड़ कर जमीन पर कब्जा दिलाने का खेल चला रहे हैं। पटना के नौबतपुर और मुजफ्फरपुर के कांटी व मुशहरी से सामने आए मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस मुख्यालय ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और पटना के डीएम को पत्र भेजकर जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यालय स्तर से जल्द ही वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित किए जाने की बात कही गई है। टीम जमीन से जुड़े दस्तावेज, पुलिस कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर सकती है।
पटना के नौबतपुर इलाके के पैनापुर में मठ की करीब 500 कट्ठा जमीन के कथित बंदरबांट का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप है कि इस जमीन की खरीद-बिक्री और कब्जे के मामले में स्थानीय स्तर पर पुलिस ने एक पक्ष का साथ दिया। मामला सामने आने के बाद पटना एसएसपी ने नौबतपुर थानेदार को निलंबित कर दिया है। पुलिस मुख्यालय को इस मामले में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और एक ठेकेदार की भूमिका से जुड़े इनपुट भी मिले हैं। अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए पटना डीएम को पत्र भेजा गया है। जांच में यह देखा जाएगा कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों में क्या प्रक्रिया अपनाई गई, जमीन की खरीद-बिक्री कैसे हुई और इसमें किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं।
मुजफ्फरपुर के कांटी और मुशहरी अंचल से भी जमीन कब्जाने और प्रशासनिक स्तर पर कथित मदद दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। अहियापुर इलाके में करीब 50 लोगों की जमीन पर कब्जे की नीयत से चारदीवारी तोड़े जाने का मामला भी जांच के दायरे में है। इस मामले को लेकर स्थानीय थानों में कई प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं और पुलिस अनुसंधान कर रही है। इन प्राथमिकी में बेलसंड से लोजपा विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई और कुछ सहयोगियों के नाम भी आरोपित के तौर पर सामने आए हैं। हालांकि, मामले में आरोपों की जांच पुलिस कर रही है और प्राथमिकी में नाम होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस अनुसंधान और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कांटी और मुशहरी के मामलों में राजस्व कर्मचारियों की कथित भूमिका की शिकायत भी पुलिस मुख्यालय तक पहुंची है। इसी आधार पर पुलिस मुख्यालय ने भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव को पत्र भेजकर विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है। जांच में राजस्व रिकॉर्ड, जमीन के कागजात, दाखिल-खारिज समेत अन्य प्रक्रियाओं की भी पड़ताल की जा सकती है।
इधर, आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू भी राज्य में जमीन के कारोबार से जुड़े संदिग्ध अपराधियों पर नजर बनाए हुए है। पैसे और प्रभाव के सहारे जमीन कब्जाने वाले कथित भू-माफियाओं की गतिविधियों और उनके नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। ईओयू ऐसे लोगों की संपत्ति, जमीन की खरीद-बिक्री और उनके संपर्कों का भी ब्योरा खंगाल रहा है। पिछले दिनों नालंदा के जमीन माफिया बताए जा रहे संजय कुमार उर्फ संतोष डॉन और जमुई के गुड्डू यादव के कथित गिरोह से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। इन मामलों में भी जमीन की खरीद-बिक्री और उससे जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस मुख्यालय अब दूसरे जिलों में भी जमीन कब्जे से जुड़े मामलों की जानकारी जुटा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। अगर जांच में सरकारी पद पर बैठे लोगों की मिलीभगत के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर जांच आगे बढ़ने के साथ यह पता चलने का इंतजार है कि करोड़ों की जमीन के इस कथित खेल के पीछे कौन-कौन लोग और कौन सा नेटवर्क सक्रिय था।