बिहार में जमीन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। विधानसभा में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से सोमवार को दो महत्वपूर्ण भूमि विधेयक पेश किए गए। इनमें एक विधेयक से कृषि भूमि का औद्योगिक या व्यावसायिक इस्तेमाल करना आसान होगा, जबकि दूसरे विधेयक के तहत जमीन के दाखिल-खारिज के लिए लोगों को अब अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा।


राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने दोनों विधेयक सदन में पेश किए। दोनों सदनों से पारित होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनके प्रावधान कानून का रूप ले सकेंगे।


कृषि जमीन पर उद्योग लगाने की राह होगी आसान

बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 को रैयतों के लिए राहत वाला कदम माना जा रहा है। इसके लागू होने के बाद कृषि भूमि को व्यावसायिक या औद्योगिक उपयोग में बदलने के लिए लगने वाला रूपांतरण शुल्क समाप्त हो जाएगा।


अब तक कृषि जमीन का इस्तेमाल उद्योग, व्यवसाय या दूसरे गैर-कृषि कार्यों के लिए करने पर रैयतों को निर्धारित शुल्क देना पड़ता था। इसके साथ ही प्रक्रिया पूरी करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था से जमीन के गैर-कृषि उपयोग की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होने की उम्मीद है।


मंत्री ने सदन में कहा कि मौजूदा कानून औद्योगिकीकरण की राह में एक बाधा बन रहा था। इसी वजह से वर्ष 2010 के संबंधित अधिनियम को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।


इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन जमीन मालिकों और निवेशकों पर पड़ सकता है, जो कृषि भूमि पर उद्योग या व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करना चाहते हैं। सरकार का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाकर राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।


दाखिल-खारिज कराने पर देना होगा ₹200

जहां कृषि भूमि के रूपांतरण के मामले में राहत दी गई है, वहीं दाखिल-खारिज को लेकर लोगों पर नया वित्तीय बोझ डाला गया है।


बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 में प्रत्येक दाखिल-खारिज याचिका पर 200 रुपये शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है। यह शुल्क केवल मूल आवेदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दाखिल-खारिज से संबंधित याचिका, अपील और पुनरीक्षण के मामलों में भी लागू होगा।


अभी दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में न्यायालय फीस के रूप में स्टांप शुल्क का प्रावधान पहले से है। अब इसके अतिरिक्त 200 रुपये का शुल्क भी देना होगा। यह राशि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के खाते में जमा होगी।


सरकार शुल्क में बदलाव भी कर सकेगी

विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकार विशेष या सामान्य आदेश के माध्यम से इस शुल्क में बदलाव कर सकती है। यानी भविष्य में सरकार परिस्थितियों के अनुसार दाखिल-खारिज से संबंधित शुल्क को बढ़ा या घटा सकती है।


आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

इन दोनों विधेयकों का असर सीधे जमीन मालिकों पर पड़ेगा। एक तरफ कृषि भूमि को उद्योग या कारोबार के लिए इस्तेमाल करने की प्रक्रिया आसान होने से निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दूसरी तरफ जमीन की खरीद-बिक्री या स्वामित्व में बदलाव के बाद दाखिल-खारिज कराने वालों को अब 200 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा।


सरकार की नजर में यह बदलाव भूमि प्रशासन को व्यवस्थित करने और औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया को गति देने से जुड़ा है। हालांकि, इन प्रावधानों का वास्तविक असर कानून लागू होने के बाद ही साफ तौर पर सामने आएगा।