पटना: बिहार विधानसभा ने मंगलवार को बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन में इस विधेयक को पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बदलते समय और तकनीक के अनुरूप राज्य में जुए पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नए कानून की आवश्यकता थी। उन्होंने सभी सदस्यों से विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की।
विधेयक पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक राज्य में 1867 के बंगाल जुआ अधिनियम के प्रावधान लागू थे। उस समय जुए का स्वरूप मुख्य रूप से ताश, पासा और पारंपरिक तरीकों तक सीमित था। लेकिन समय के साथ सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने जुए के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। आज ऑनलाइन ऐप, वेबसाइट और अन्य डिजिटल माध्यमों से बड़े पैमाने पर जुआ खेला जा रहा है, जिसे पुराने कानून के तहत प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना संभव नहीं था।
उन्होंने कहा कि नया विधेयक केवल जुआ खेलने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों और संस्थाओं को भी इसके दायरे में लाया गया है जो जुआ संचालित करते हैं, जुआ खेलने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हैं या जुए से कमीशन प्राप्त करते हैं। ऐसे सभी व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
सदन में चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से कुछ सदस्यों ने विधेयक को लेकर अपनी चिंताएं भी जाहिर कीं। राजद विधायक राहुल शर्मा ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इसे और विस्तार से विचार करना चाहिए। इस पर जवाब देते हुए विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह विषय पहले सुप्रीम कोर्ट तक भी गया था, जहां यह स्पष्ट किया गया कि जुआ संबंधी कानून बनाना राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इसी आधार पर बिहार सरकार ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए नया कानून तैयार किया है।
उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि सरकार विधेयक को जल्दबाजी में लेकर आई है। उन्होंने कहा कि जिस कानून को बदला जा रहा है वह करीब 159 वर्ष पुराना है। इतने लंबे समय तक पुराने कानून के आधार पर काम किया गया, जबकि जुए के तौर-तरीकों में पूरी तरह बदलाव आ चुका है। ऐसे में नए कानून को लाना समय की जरूरत थी, न कि जल्दबाजी।
उन्होंने यह भी बताया कि विधेयक में अपराध की गंभीरता को देखते हुए दंड के अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। पहली बार जुआ खेलने या उससे जुड़े अपराध में पकड़े जाने वालों के लिए अलग सजा का प्रावधान है, जबकि दोबारा अपराध करने वालों के लिए अधिक कठोर दंड निर्धारित किया गया है। इससे आदतन अपराध करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक ही लेनदेन में बड़ी रकम का आदान-प्रदान हो रहा है, जिससे आर्थिक अपराध और सामाजिक बुराइयों को बढ़ावा मिल रहा है। नया कानून ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने और समाज को जुए जैसी कुरीति से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
उन्होंने सदन से कहा कि जुआ एक सामाजिक अपराध है और इसे रोकने के लिए सभी दलों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सहयोग करना चाहिए। सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को परेशान करना नहीं, बल्कि समाज में फैल रही इस बुराई पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
विस्तृत चर्चा और सरकार के जवाब के बाद बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, 2026 को विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए कानून के लागू होने के बाद राज्य में पारंपरिक जुए के साथ-साथ ऑनलाइन, डिजिटल और तकनीक आधारित जुए के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा।