Bihar Politics : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार और झारखंड के विभाजन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि जब बिहार और झारखंड के बंटवारे की प्रक्रिया चल रही थी, तब वह और श्रवण कुमार दुखी मन से वोटिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार के विभाजन के पक्ष में वोट करने की सोच उनके मन में नहीं थी।


सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार का विभाजन सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं था, बल्कि इसका सीधा असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा। उन्होंने पुराने बिहार की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय टाटा और बोकारो जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बिहार का हिस्सा थे। रॉयल्टी के रूप में बिहार को बड़ी राशि मिलती थी और उस समय राज्य की आय का बड़ा हिस्सा झारखंड क्षेत्र से आता था।


मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह पहली बार सदन में पहुंचे थे, तब बिहार का बजट करीब 6 हजार करोड़ रुपये था। उनके मुताबिक, उस समय बिहार के बजट में लगभग 87 प्रतिशत राशि झारखंड क्षेत्र से आने वाले राजस्व से जुड़ी थी। वर्ष 2000 में बिहार और झारखंड का विभाजन हुआ और इसके बाद बिहार की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई।


सम्राट चौधरी ने बिहार-झारखंड विभाजन के पीछे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सोच का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सोच थी कि आदिवासी समाज के लोगों के लिए एक अलग राज्य बनाया जाए, ताकि वहां रहने वाले आदिवासी समाज के लोग विकास और समृद्धि की ओर आगे बढ़ सकें। सम्राट चौधरी के मुताबिक, इसी सोच के तहत झारखंड को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार के बंटवारे को लेकर वह और श्रवण कुमार दुखी थे और उन्होंने सदन में दुखी मन से वोटिंग की थी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बिहार की स्थिति पहले के मुकाबले काफी बदली है। उन्होंने वर्ष 2005 के बाद हुए बदलावों का जिक्र करते हुए नीतीश कुमार के कार्यकाल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 2005 के बाद बिहार की व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया और राज्य को विकास की दिशा में आगे ले जाने का काम हुआ। सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के समय बिहार को करीब 23 हजार करोड़ रुपये के बजट के साथ आगे बढ़ना था। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की ओर से बिहार को दिए गए विशेष पैकेज का भी उल्लेख किया।


उन्होंने कहा कि उस समय बिहार के लिए 16 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिया गया था। वर्ष 2001 से 2005 के बीच हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपये दिए जाने की बात थी। सम्राट चौधरी का दावा है कि वर्ष 2005 तक इस राशि का उपयोग नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि बाद में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो बिहार के पास यह अतिरिक्त राशि थी और राज्य का बजट करीब 23 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा।


सम्राट चौधरी ने अपने वित्त मंत्री रहते हुए वर्ष 2024 के बजट को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बजट पेश करना शुरू किया तो उन्होंने अपने चेंबर से झारखंड का बजट देखा। उनके मुताबिक, उस समय झारखंड का बजट करीब 1 लाख 39 हजार करोड़ रुपये था। सम्राट चौधरी ने कहा कि एक समय बिहार के राजस्व में झारखंड क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 87 प्रतिशत थी, जबकि बिहार के हिस्से में महज 13 प्रतिशत राजस्व बचा था। इसके बावजूद बिहार ने आगे बढ़ते हुए अपना बजट 3 लाख 17 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि यही बदला हुआ बिहार है, जिसने विभाजन के बाद आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ाया है।