Bihar JDU : बिहार में एक तरफ MLC चुनाव को लेकर सियासी घमासान मचा है, वहीं दूसरी तरफ जनता दल (यूनाइटेड) ने युवा प्रदेश टीम की नई सूची जारी कर दी है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के निर्देश पर युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीतीश पटेल ने नई टीम का ऐलान किया है। चुनावी माहौल के बीच अचानक युवा संगठन में नई नियुक्तियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि जब पार्टी को चुनाव के दौरान अपने संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने की जरूरत है, तब नई टीम बनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई?


बिहार में विधान परिषद की स्नातक सीटों के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी हुई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी उम्मीदवार अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हैं। इस चुनाव में पढ़े-लिखे मतदाताओं की भूमिका अहम है और ऐसे में युवाओं तक पहुंच बनाना भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इसी बीच जदयू ने युवा संगठन की नई प्रदेश टीम का ऐलान कर दिया है। ऐसे समय में यह फैसला संगठन की तैयारियों और चुनावी प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।


नई सूची में प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश सचिव समेत कई पदों पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है। बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में नाम शामिल किए गए हैं। समस्तीपुर, पटना, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गया, औरंगाबाद, दरभंगा, कटिहार, बक्सर और नालंदा समेत कई जिलों के कार्यकर्ताओं को टीम में जगह मिली है। महिलाओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।


लेकिन सवाल सिर्फ नई टीम में कितने लोगों को जगह मिली, इसका नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या नई नियुक्तियों से चुनाव के समय संगठन की सक्रियता बढ़ेगी या फिर पदों के बंटवारे तक ही यह कवायद सीमित रह जाएगी? चुनाव के बीच संगठन में फेरबदल होने पर यह देखना जरूरी हो जाता है कि नई जिम्मेदारी पाने वाले पदाधिकारी जमीन पर कितने सक्रिय होते हैं और पार्टी के लिए कितना काम करते हैं।


जदयू की नई टीम में, अमित प्रकाश, कृष्णदेव कुशवाहा, राकेश रंजन सिंह उर्फ लल्लू, अजय कुमार रविदास, निवेदिता मिश्रा, अभय प्रताप सिंह, नरेश दांगी, नागेंद्र सिंह, मनीष यादव, विवेक पटेल और डॉ. जावेद सिद्दीकी समेत कई नेताओं को जगह दी गई है। महिला पदाधिकारियों में पल्लवी राय, पूनम देवी, अनिष्का कुमारी, सोनी माला गुप्ता और अंशु रानी समेत अन्य नाम शामिल हैं।


राजनीतिक तौर पर युवा संगठन किसी भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होता है। लेकिन सिर्फ नई सूची जारी कर देने से संगठन मजबूत हो जाता है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि पदाधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारी मिले, वे जिलों और प्रखंडों में सक्रिय रहें और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाएं। खासकर चुनावी समय में संगठन की वास्तविक ताकत नियुक्तियों से नहीं, बल्कि मैदान में उसकी सक्रियता से सामने आती है।


ऐसे में MLC चुनाव के बीच जदयू की नई युवा टीम के गठन को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। क्या पार्टी पहले से चल रही संगठनात्मक प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, या चुनावी माहौल में युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जरूरत महसूस हुई है? इस पर पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। इसलिए इसे सीधे चुनावी रणनीति का हिस्सा मानना जल्दबाजी होगी। फिलहाल जदयू नेतृत्व ने नई टीम के सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। अब असली परीक्षा नई टीम की होगी। देखना होगा कि यह टीम केवल पदाधिकारियों की सूची बनकर रह जाती है या फिर चुनावी माहौल में पार्टी के लिए जमीन पर सक्रिय भूमिका भी निभाती है।