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Bihar IAS officers : बिहार में बनी हुई IAS अधिकारियों की कमी, 2026 में बिप्रसे से 14 नए अधिकारी होंगे शामिल

बिहार में आईएएस अधिकारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। 2026 में बिप्रसे से 14 नए अधिकारी जुड़ेंगे, जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति और विकास योजनाओं में तेजी आएगी।

02-Dec-2025 12:20 PM

By First Bihar

Bihar IAS officers : बिहार प्रशासनिक सेवा (बिप्रसे) से अगले साल यानी 2026 में राज्य को 14 नए आईएएस अधिकारी मिलने वाले हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज में गति आएगी और राज्य सरकार की विकास परियोजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। इस साल भी बिप्रसे से राज्य में 19 आईएएस अधिकारी बनाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य में आईएएस अधिकारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है।


हर साल लगभग 40 से 50 आईएएस पद रिक्त रह जाते हैं, जिससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर उतारने में बाधा आती है। वर्तमान में बिहार कैडर में 359 आईएएस पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 308 अधिकारी पदस्थापित हैं, यानी कुल 51 पद खाली हैं। राज्य सरकार बार-बार केंद्र से इन रिक्त पदों को भरने की मांग कर चुकी है, लेकिन अभी तक पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।


आईएएस अधिकारियों की कमी के कारण कई वरिष्ठ अधिकारी एक साथ दो या अधिक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उदाहरण के लिए, कुंदन कुमार उद्योग विभाग के सचिव होने के साथ-साथ नई दिल्ली स्थित बिहार भवन में स्थानिक आयुक्त, मुंबई में निवेश आयुक्त, बिहार फाउंडेशन के सीईओ, बियाडा और आइडा के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। इसी तरह, संजय कुमार सिंह वाणिज्यकर आयुक्त और गृह विभाग में ओएसडी के साथ कार्य कर रहे हैं, जबकि लोकेश कुमार सिंह स्वास्थ्य सचिव के साथ पर्यटन सचिव की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।


सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंदर के पास शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार है। कौशल किशोर दरभंगा और तिरहुत प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त के रूप में दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अभय कुमार सिंह नगर विकास और आईटी विभाग दोनों की देखरेख कर रहे हैं, जबकि पंकज कुमार कृषि और खाद्य आपूर्ति विभाग के साथ जुड़े हुए हैं।


इस स्थिति से स्पष्ट होता है कि आईएएस अधिकारियों की कमी राज्य प्रशासन के कामकाज को प्रभावित कर रही है। कई मामलों में निर्णय लेने में देरी हो रही है और योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया धीमी पड़ रही है। नए आईएएस अधिकारियों के शामिल होने से प्रशासनिक कामकाज में सुधार होगा और राज्य सरकार अपनी योजनाओं को तेजी से लागू कर सकेगी।


राज्य में आईएएस अधिकारियों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हर अधिकारी की जिम्मेदारी कई विभागों और परियोजनाओं पर होती है। जब अधिकारियों पर अतिरिक्त भार होता है, तो वे अपने कार्यों को पूरी तरह से ध्यान और समय नहीं दे पाते। इससे न केवल प्रशासनिक निर्णयों की गति धीमी होती है, बल्कि विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।


बिहार सरकार की यह कोशिश कि बिप्रसे से नए आईएएस अधिकारी तैयार हों और उन्हें राज्य प्रशासन में शामिल किया जाए, राज्य के विकास और प्रशासनिक दक्षता के लिए अहम कदम है। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। आने वाले वर्षों में आईएएस अधिकारियों की भर्ती और उन्हें समय पर कार्यभार सौंपना राज्य की शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा और बिहार के विकास को गति देगा।


कुल मिलाकर, आईएएस अधिकारियों की कमी के कारण बिहार प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ा है, लेकिन नए अधिकारियों के शामिल होने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और राज्य सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से हो सकेगा। नए अधिकारी प्रशासनिक सुधारों और विकास योजनाओं के सुचारु कार्यान्वयन में अहम भूमिका निभाएंगे।