Bihar News : बिहार में दशहरा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से लेकर जिला, अनुमंडलीय अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तक चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त रखने को कहा गया है। त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सड़क दुर्घटनाओं और अचानक होने वाली चिकित्सा संबंधी जरूरतों को देखते हुए विभाग ने अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर भगदड़ और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मंदिर के पास ट्रक से हुए दर्दनाक हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता बढ़ गई है। इन घटनाओं ने एक बार फिर भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की अहमियत को सामने ला दिया है। बिहार में भी दशहरा के दौरान बड़ी संख्या में लोग पूजा पंडालों, मंदिरों और मेले में पहुंचते हैं। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की स्थिति में घायलों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए अस्पतालों को तैयार रहने को कहा गया है।
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के प्राचार्यों, अधीक्षकों और सभी जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अस्पतालों में चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सक्रिय रखने के साथ मरीजों को मुफ्त जांच और दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी दुरुस्त रखने को कहा गया है। त्योहार के दौरान अस्पतालों में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े, इस पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने केवल निर्देश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी है, बल्कि व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए निरीक्षण की तैयारी भी की है। राज्य स्तर और प्रमंडलीय मुख्यालयों में तैनात अधिकारी सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान यह देखा जाएगा कि अस्पतालों में डॉक्टर और अन्य कर्मचारी मौजूद हैं या नहीं, आपातकालीन सेवाएं किस स्थिति में हैं और मरीजों को जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।
ट्रामा चिकित्सा एवं सड़क सुरक्षा के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार सिन्हा ने सभी प्रमंडलों में तैनात क्षेत्रीय कार्यक्रम पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया है। उन्हें उन अस्पतालों में से तीन का निरीक्षण करने को कहा गया है, जहां मरीजों की संख्या अधिक रहती है। इसमें अनुमंडलीय अस्पतालों के साथ पीएचसी, सीएचसी और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं।
निरीक्षण के बाद अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजनी होगी। इसके लिए अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जांच के लिए अलग-अलग प्रारूप निर्धारित किए गए हैं। इन प्रारूपों के माध्यम से हर जरूरी बिंदु की पड़ताल कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। विभाग को पूर्णिया जिले के केनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के औचक निरीक्षण की रिपोर्ट भी भेजे जाने की जानकारी मिली है।
दरअसल, ग्वालियर में शनिवार देर रात हुए हादसे ने सड़क सुरक्षा और भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों के आसपास यातायात नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दिल्ली निवासी ट्रक चालक बिलबाग सिंह गूगल मैप की मदद से रास्ता तलाश रहा था। इसी दौरान धान से लदा ट्रक ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास प्रतिबंधित मार्ग में पहुंच गया। वहां मौजूद श्रद्धालु वाहन की चपेट में आ गए। पुलिस के अनुसार, हादसे में 15 लोगों की मौत हुई और 25 से अधिक लोग घायल हुए। चालक को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने या समय पर ब्रेक नहीं लगने की आशंका जताई गई।
इससे पहले कोलकाता के चोरबागान इलाके में दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर बारिश के बीच भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई थी। इस घटना में कम से कम 17 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बताया गया कि पूजा आयोजन से जुड़ी एक घोषणा के बाद अचानक भीड़ बढ़ी और हालात बिगड़ गए।
लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसों के बीच बिहार स्वास्थ्य विभाग की तैयारी की असली परीक्षा दशहरा के दौरान होगी। अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी, जरूरी दवाओं की उपलब्धता और त्वरित इलाज की व्यवस्था यह तय करेगी कि किसी आपात स्थिति में लोगों को कितनी जल्दी मदद मिल पाती है। त्योहार के उल्लास के बीच प्रशासन की कोशिश है कि दुर्घटना या भगदड़ जैसी स्थिति में घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके और लापरवाही की गुंजाइश कम से कम रहे।