Bihar News : बिहार सरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने फैसला किया है कि राज्य की हर ग्राम पंचायत में “सहयोग शिविर” का आयोजन किया जाएगा, जहां पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारी मौजूद रहेंगे।इन शिविरों में आम लोग अपनी समस्याओं और विकास से जुड़े आवेदन सीधे अधिकारियों को सौंप सकेंगे। 


अब इससे जुड़ें मामले को लेकर बिहार सरकार के सुचना जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि- सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों का चक्कर न लगाना पड़े और तय समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित हो।सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि आवेदन संबंधित अधिकारी के स्तर पर समाधान योग्य है तो उसे हर हाल में 30 दिनों के भीतर निष्पादित करना होगा। यदि तय समय सीमा के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कहा गया है कि गंभीर लापरवाही की स्थिति में संबंधित कर्मी की सेवा भी समाप्त की जा सकती है।


इस पहल को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सराहना करते हुए कहा गया कि सरकार जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है। बताया गया कि पंचायत स्तर पर लगने वाले इन शिविरों में संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे और वहीं पर आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। प्रत्येक आवेदन को सूचीबद्ध कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा ताकि उसकी निगरानी की जा सके।


विकास कार्यों से जुड़े मामलों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई गई है। यदि किसी योजना या मांग का समाधान पंचायत या प्रखंड स्तर पर संभव नहीं होगा तो उसे जिला पदाधिकारी के स्तर पर भेजा जाएगा। वहां से भी समाधान नहीं होने पर मामला आयुक्त स्तर तक जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। सरकार प्राथमिकता तय कर आवश्यक योजनाओं और जनहित के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देगी।


इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता में बढ़ते असंतोष को कम करना और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। लंबे समय से लोगों की शिकायत रही है कि आवेदन देने के बावजूद समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होता, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती है। अब सरकार इसे गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रही है।


बताया गया कि इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से की जाएगी। पटना स्तर पर नियमित समीक्षा बैठक होगी और सभी लंबित मामलों की जानकारी ली जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी आवेदन को अनदेखा नहीं किया जाए और सभी मामलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग सुनिश्चित की जाए।


सरकार की ओर से एक विशेष हेल्पलाइन नंबर “1100” भी जारी किया गया है। इस नंबर के माध्यम से लोग अपनी शिकायतों और समस्याओं की जानकारी दे सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और गांव स्तर तक लोगों को त्वरित राहत मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के समाधान में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।