Bihar Teacher News: बिहार में सरकारी शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन भुगतान को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। अब अगले महीने का वेतन जारी करने से पहले सभी संबंधित कर्मियों के एचआरएमएस डेटा का सत्यापन अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य के प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय कमिटी गठित की जाएगी। कमिटी को 22 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के डेटा की जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग ने यह कदम भागलपुर में एक फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख रुपये के कथित वेतन भुगतान का मामला सामने आने के बाद उठाया है। विभाग का उद्देश्य वेतन भुगतान में गड़बड़ियों को रोकना और सरकारी राशि के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना है। शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) विजय कुमार पांडेय ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर एचआरएमएस डेटा का सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। इसके तहत प्रत्येक जिले में कार्यरत सभी शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले वेतन भुगतान से पहले सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जांच के दौरान कर्मचारियों के विवरण, सेवा रिकॉर्ड और वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़ों का मिलान किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की विसंगति या संभावित वित्तीय अनियमितता की पहचान की जा सके।
दरअसल, भागलपुर में एक फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख रुपये के कथित वेतन भुगतान का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद सरकारी शिक्षकों के वेतन भुगतान की व्यवस्था पर सवाल उठे। इसके बाद वित्त विभाग ने राज्यभर में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन एवं भत्तों की शत-प्रतिशत जांच कराने का निर्देश दिया। वित्त विभाग ने 9 अक्टूबर को शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़ों की जांच करने और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने को कहा था। प्रारंभिक जांच में भी कई विसंगतियां सामने आने का उल्लेख किया गया। इसी के बाद अब जिला स्तर पर सभी संबंधित कर्मियों के एचआरएमएस डेटा का सत्यापन कराया जा रहा है।
बिहार में सरकारी कर्मियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होती है। एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से वेतन विपत्र तैयार किया जाता है। इसके बाद मेकर, चेकर और एप्रूवर स्तर पर उसकी जांच और मंजूरी दी जाती है। अंत में सीएफएमएस (CFMS) के माध्यम से संबंधित कर्मियों के बैंक खातों में वेतन भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कर्मचारियों के डेटा की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। यदि रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज हो या सत्यापन में लापरवाही बरती जाए, तो गलत भुगतान की आशंका बनी रहती है। जिला स्तरीय कमिटी के माध्यम से डेटा की जांच होने से ऐसी गड़बड़ियों को पहचानने और उन्हें सुधारने में मदद मिल सकती है।
वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि जांच के दौरान वित्तीय अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। गलत तरीके से भुगतान की गई राशि की वसूली के साथ नियमानुसार आपराधिक और अनुशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है। शिक्षा विभाग ने वेतन भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने पर जोर दिया है। ऐसे में जिला स्तर पर होने वाला सत्यापन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य के सभी जिलों में गठित की जाने वाली कमिटी को 22 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के एचआरएमएस डेटा की जांच पूरी करनी होगी। विभाग के निर्देश के अनुसार, अगले वेतन भुगतान से पहले सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। इस पहल से वेतन भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतन भुगतान पर इसका वास्तविक असर सत्यापन की प्रगति और विभागीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।