पटना: बिहार के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के लिए आवास भत्ता यानी HRA (House Rent Allowance) को लेकर शिक्षा विभाग ने नियमों को और स्पष्ट कर दिया है। अब आवास भत्ता का लाभ लेने के लिए केवल सामान्य आवेदन पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित शिक्षक या कर्मी को निर्धारित आवेदन पत्र के साथ कार्यपालक दंडाधिकारी स्तर से निर्गत शपथ पत्र और स्व-घोषणा पत्र भी जमा करना होगा।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी संशोधित दिशा-निर्देश के बाद जिलों में HRA भुगतान की प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है। नालंदा में स्थापना डीपीओ प्रवीण कुमार प्रभात ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर संशोधित नियमों की जानकारी दी है। इसके आधार पर अब अन्य जिलों में भी शिक्षकों के आवास भत्ता दावों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया को विभागीय नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाया जा सकता है।
आवेदन के साथ देना होगा शपथ पत्र
संशोधित व्यवस्था के तहत HRA का लाभ लेने वाले शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को निर्धारित आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें कार्यपालक दंडाधिकारी स्तर से जारी शपथ पत्र और स्व-घोषणा पत्र प्रमुख हैं।
संबंधित शिक्षक अपने दस्तावेज प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी यानी BEO के माध्यम से जमा करेंगे। इसके बाद दस्तावेजों और दावे की जांच की जाएगी। जिला स्तर पर जांच एवं समीक्षा पूरी होने के बाद ही आवास भत्ता भुगतान की अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य HRA भुगतान में एकरूपता लाने के साथ-साथ गलत दावे या गलत क्षेत्र के आधार पर अधिक दर का लाभ लेने की संभावना को रोकना है।
बिहार में क्षेत्र के हिसाब से तय होगी HRA की दर
बिहार के सरकारी विद्यालयों में HRA की दर विद्यालय के स्थान और संबंधित शहरी निकाय की अधिसूचित सीमा के आधार पर निर्धारित होगी। संशोधित व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग दर लागू होगी। बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्र की आठ किलोमीटर की परिधि में स्थित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को मूल वेतन का 10 प्रतिशत HRA देय होगा। वहीं, नगर परिषद और नगर पंचायत की वास्तविक अधिसूचित सीमा के अंदर स्थित विद्यालयों के शिक्षकों को मूल वेतन का 7.5 प्रतिशत आवास भत्ता मिलेगा।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं संबंधित कर्मियों के लिए HRA की दर मूल वेतन का 5 प्रतिशत निर्धारित है। यानी किसी शिक्षक को कितना HRA मिलेगा, यह केवल उसके घर की लोकेशन से नहीं बल्कि विद्यालय किस क्षेत्र में स्थित है और वह क्षेत्र किस श्रेणी में आता है, इस आधार पर तय होगा।
नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए बड़ा बदलाव
संशोधित नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव नगर परिषद और नगर पंचायत की आठ किलोमीटर की परिधि को लेकर है। पहले नगर निकाय के आसपास आठ किलोमीटर के दायरे में आने वाले विद्यालयों को शहरी दर से HRA मिलने की व्यवस्था का लाभ मिल सकता था। अब संशोधित दिशा-निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि नगर परिषद या नगर पंचायत की केवल आठ किलोमीटर की परिधि में होना पर्याप्त नहीं है।
7.5 प्रतिशत HRA का लाभ तभी मिलेगा, जब विद्यालय अधिसूचित नगर निकाय की वास्तविक भौगोलिक सीमा के अंदर स्थित हो। इसका सीधा असर उन विद्यालयों पर पड़ सकता है, जो नगर परिषद या नगर पंचायत से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हैं, लेकिन प्रशासनिक रूप से ग्रामीण क्षेत्र में आते हैं। ऐसे विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शहरी HRA के बजाय ग्रामीण क्षेत्र के लिए निर्धारित दर का लाभ मिल सकता है।
जिन स्कूलों को अब तक HRA नहीं मिला, उनकी बनेगी रिपोर्ट
संशोधित आदेश में जिलों के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि अधिसूचित नगर निकाय की सीमा के अंदर आने वाले ऐसे विद्यालयों की पहचान की जाए, जहां शिक्षक वर्तमान में निर्धारित HRA से वंचित हैं। ऐसे विद्यालयों की संशोधित रिपोर्ट तैयार कर विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इसका मतलब है कि जिन शिक्षकों को नियमों के तहत 7.5 प्रतिशत HRA मिलना चाहिए था, लेकिन किसी कारण से भुगतान नहीं हो रहा था, उनके मामलों की दोबारा समीक्षा की जा सकती है। विद्यालय प्रधान और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्हें विद्यालय की वास्तविक स्थिति, नगर निकाय की सीमा और संबंधित शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच के बाद रिपोर्ट आगे भेजनी होगी।
पूरे बिहार के शिक्षकों पर पड़ेगा असर
हालांकि सामने आया आदेश नालंदा जिले के स्तर पर जारी किया गया है, लेकिन इसमें लागू किए गए विभागीय दिशा-निर्देश बिहार के सरकारी विद्यालयों में HRA निर्धारण की व्यापक व्यवस्था को समझने में महत्वपूर्ण हैं। बिहार में बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालय नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। ऐसे में HRA की दर को लेकर शिक्षकों के बीच लंबे समय से यह सवाल रहता है कि उनका विद्यालय किस श्रेणी में आता है और उन्हें किस दर से आवास भत्ता मिलना चाहिए। संशोधित नियमों के बाद अब विद्यालय की वास्तविक प्रशासनिक स्थिति और अधिसूचित सीमा महत्वपूर्ण हो गई है।
शिक्षकों को क्या करना होगा?
HRA का लाभ लेने या लंबित भुगतान के मामले में शिक्षकों को सबसे पहले अपने विद्यालय और संबंधित प्रखंड शिक्षा कार्यालय से जानकारी लेनी होगी। निर्धारित आवेदन के साथ आवश्यक शपथ पत्र और स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा।इसके बाद BEO स्तर से दस्तावेजों की जांच और जिला स्तर पर समीक्षा के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे शिक्षक जिनका विद्यालय नगर परिषद या नगर पंचायत की वास्तविक अधिसूचित सीमा में आता है, लेकिन उन्हें अभी तक 7.5 प्रतिशत HRA नहीं मिल रहा है, उनके मामले में संशोधित रिपोर्ट तैयार होने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर बिहार के सरकारी शिक्षकों के लिए HRA का नया नियम यह स्पष्ट करता है कि आवास भत्ते की दर तय करने में आठ किलोमीटर की दूरी से ज्यादा महत्व अब संबंधित नगर निकाय की वास्तविक अधिसूचित सीमा का होगा।