पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार अब प्रशासनिक अधिकारियों को भी बच्चों की पढ़ाई और मार्गदर्शन से जोड़ रही है। राज्य में विकसित किए जा रहे सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों को सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी पढ़ाते और उनका मार्गदर्शन करते नजर आएंगे। अधिकारियों की यह भूमिका केवल स्कूलों के निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे विद्यार्थियों के साथ कक्षा में बैठकर उन्हें पढ़ाई, करियर और उच्च शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी देंगे।
बिहार सरकार की ओर से बड़ी संख्या में मॉडल स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ-साथ पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रशासनिक अधिकारियों को विद्यालयों से जोड़ने की पहल को अहम माना जा रहा है।
अफसर सिर्फ निरीक्षण नहीं करेंगे, बच्चों को पढ़ाएंगे भी
अब तक सरकारी स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी कई जगहों पर विद्यार्थियों से सीधे संवाद और शैक्षणिक गतिविधियों में भी भाग लेते दिखाई देंगे। उप विकास आयुक्त (DDC), अनुमंडल पदाधिकारी (SDM), भूमि सुधार उप समाहर्ता समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी अपनी रुचि और विशेषज्ञता के अनुसार विद्यार्थियों की कक्षाएं ले सकते हैं।
इसका उद्देश्य बच्चों को किताबों की पढ़ाई के साथ वास्तविक जीवन और प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी देना है। अधिकारी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और अलग-अलग करियर विकल्पों के बारे में भी मार्गदर्शन देंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भविष्य की संभावनाओं को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कमजोर विद्यार्थियों पर भी रहेगी नजर
मॉडल स्कूलों में पढ़ाई में अपेक्षाकृत कमजोर विद्यार्थियों के लिए रेमेडियल कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। इन कक्षाओं की निगरानी में भी प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका रहेगी।अधिकारी यह देखेंगे कि कमजोर विद्यार्थियों के लिए चल रही अतिरिक्त कक्षाओं का सही तरीके से संचालन हो रहा है या नहीं। जरूरत के अनुसार स्कूल प्रशासन को सुधार के लिए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।
स्कूलों की व्यवस्था भी जांचेंगे अधिकारी
अधिकारियों को केवल पढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। वे स्कूलों में जाकर शिक्षकों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा करेंगे।विद्यालय में किसी तरह की कमी मिलने पर उसके सुधार के लिए संबंधित विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अधिकारियों को अपनी कक्षाओं और स्कूल निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट भी नियमित रूप से जिला शिक्षा पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
स्मार्ट क्लास और हाईटेक लैब से बदलेगा पढ़ाई का तरीका
बिहार के मॉडल स्कूलों को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, ई-लाइब्रेरी, साइंस लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को ऑनलाइन इंटरैक्टिव लर्निंग से जोड़ने के लिए 'विद्या साथी' जैसी पहल भी की जा रही है। कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर संध्याकालीन कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराने पर जोर है।
सरकार का फोकस सिर्फ स्कूल खोलने पर नहीं
बिहार में मॉडल स्कूलों की अवधारणा का लक्ष्य केवल नई इमारत और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना नहीं है। इसके पीछे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, डिजिटल शिक्षा और करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बड़ी योजना है।प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने का प्रयोग इसी दिशा में देखा जा रहा है। अगर अधिकारी नियमित रूप से बच्चों से संवाद करते हैं और उन्हें अपने अनुभव साझा करते हैं, तो विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर की तैयारी के लिए भी नई प्रेरणा मिल सकती है।यानी बिहार के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षा का दायरा सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहने वाला। क्लासरूम में शिक्षक पढ़ाएंगे, जबकि अफसर अपने अनुभव से बच्चों को भविष्य की राह दिखाने की कोशिश करेंगे।