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29-Nov-2025 02:25 PM
By First Bihar
बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को देखते हुए राज्य में पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। फसल अवशेष जलाने से हवा जहरीली हो जाती है, मिट्टी की उर्वरता घटती है और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए सरकार ने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा है कि नियम उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिला कृषि पदाधिकारी प्रभात कुमार के अनुसार, पराली जलाने वाले किसानों का किसान पंजीकरण ब्लॉक कर दिया जाएगा और कृषि विभाग की कोई भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही ऐसे मामलों में BNS धारा-152 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
पंचायत स्तर से जागरूकता अभियान
कृषि विभाग द्वारा पूरे बिहार में पंचायत से लेकर जिला स्तर तक पराली प्रबंधन को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। किसानों को बताया जा रहा है कि फसल अवशेष जलाना न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी घटा देता है।
हार्वेस्टर मालिकों के लिए नई व्यवस्था
अब जिले में सभी कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों और चालकों को शपथ पत्र या आवेदन पत्र जमा करना अनिवार्य होगा। पास मिलने के बाद ही वे फसल कटाई का कार्य कर सकेंगे। यह कदम अवशेष प्रबंधन को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
पुआल प्रबंधन के लिए सरकार दे रही 40%–70% तक सब्सिडी
किसानों को पराली न जलाने और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए सरकार कई यंत्रों पर सब्सिडी दे रही है। इसमें शामिल हैं स्ट्रा बेलर, सुपर हैप्पी सीडर जीरो टिल सीड-कम फर्टिलाइजर ड्रिल, स्ट्रा रीपर, रोटरी मल्चर एसएमएस (Straw Management System) इससे किसानों को पुआल के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी और खेती की लागत भी कम होगी।
पुआल नहीं जलाने से मिलता है मिट्टी को पोषक तत्व
एक टन पुआल को आग नहीं लगाकर उसे मिट्टी में मिला देने से खेती को मिलते हैं नाइट्रोजन : 20–30 किग्रा, पोटाश : 60–100 किग्रा, सल्फर : 5–7 किग्रा,ऑर्गेनिक कार्बन : 600 मिलीग्राम ये तत्व जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं और पैदावार को बेहतर बनाते हैं।
पुआल जलाने से होता है भारी नुकसान
एक टन पराली जलाने पर वातावरण में निकलते हैं 3 किग्रा PM (धूल-कण), 60 किग्रा CO (कार्बन मोनोऑक्साइड), 1460 किग्रा CO₂ 190 किग्रा राख 2 किग्रा SO₂ इनसे पर्यावरण गंभीर रूप से प्रदूषित होता है।
स्वास्थ्य पर खतरनाक असर
पराली जलाने से उठने वाला धुआँ पैदा करता है सांस की दिक्कत,आंखों में जलन,नाक और गले की समस्या, दमा और एलर्जी के खतरे का असर हो सकता है।
सरकार की अपील
बिहार सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं और आधुनिक मशीनों का उपयोग करके खेतों में पुआल का प्रबंधन करें। इससे पर्यावरण बचाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।