Bihar News : बिहार सरकार ने सरकारी दफ्तरों में वर्षों से चली आ रही फाइलों की धीमी रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी सरकारी फाइल किसी एक टेबल पर तीन दिन से अधिक नहीं रुकेगी। तय समय के भीतर फाइल आगे नहीं बढ़ने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय होगी और जरूरत पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
सरकार का मानना है कि फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने से विकास कार्यों, योजनाओं और आम लोगों से जुड़े मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी होती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और तेजी लाना है।
हर स्तर पर तय हुई समय-सीमा
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सचिवालय में फाइलों के संचालन के लिए कनिष्ठ कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभी के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। किसी भी स्तर पर फाइल को तीन दिन से अधिक रोकना स्वीकार्य नहीं होगा। यदि किसी कारण से देरी होती है तो उसका स्पष्ट कारण दर्ज करना होगा और संबंधित अधिकारी-कर्मचारी इसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे।
फाइल ट्रैकिंग होगी आसान
नई SOP में फाइलों के रखरखाव पर भी विशेष जोर दिया गया है। निर्देश दिया गया है कि हर फाइल में विषय का संक्षिप्त सार लिखा जाएगा। जिस अधिकारी या कर्मचारी ने फाइल पर टिप्पणी की होगी, वह अपने हस्ताक्षर के साथ पूरा नाम और तिथि भी दर्ज करेगा। इससे किसी भी समय यह पता लगाया जा सकेगा कि फाइल किस स्तर पर लंबित है और उसमें कितनी प्रगति हुई है।
छुट्टी बहाना नहीं बनेगी
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी कर्मचारी के अवकाश पर रहने से सरकारी काम प्रभावित नहीं होना चाहिए। ऐसे मामलों में पहले से वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। बिना पूर्व स्वीकृति के अवकाश लेने से भी बचने का निर्देश दिया गया है ताकि फाइलों का निपटारा समय पर होता रहे।
हर पखवाड़े होगी समीक्षा
नई व्यवस्था के तहत विभागों में नियमित समीक्षा की जाएगी। प्रत्येक पखवाड़े आयोजित बैठक में यह जानकारी देनी होगी कि कितनी नई फाइलें आईं, कितनी का निपटारा हुआ और कौन-सी फाइलें अब भी लंबित हैं। साथ ही लंबित मामलों के कारण भी दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक बुधवार को सभी शाखाओं के अधिकारी लंबित फाइलों की सूची तैयार कर स्थापना शाखा को भेजेंगे।
न्यायिक मामलों को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार ने न्यायालय से जुड़े मामलों को सबसे अधिक प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। जिन मामलों में प्रतिशपथ पत्र (काउंटर एफिडेविट) दाखिल नहीं किया गया है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करना होगा। इसका उद्देश्य अदालतों में लंबित सरकारी मामलों की संख्या कम करना और समय पर जवाब दाखिल करना है।
स्वयं लिखनी होगी टिप्पणी
नई SOP में यह भी कहा गया है कि अधिकारी और कर्मचारी अपनी टिप्पणी स्वयं लिखेंगे। यदि किसी अन्य व्यक्ति से टिप्पणी लिखवाई या टाइप कराई जाती है तो संबंधित अधिकारी को प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर करने होंगे। इससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनी रहेगी।
प्रशासनिक कार्यों में आएगी तेजी
सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी, विभागों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा। यह फैसला प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और लंबित मामलों को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।