Satyanarayan Death: बिहार के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत को शुक्रवार को बड़ी क्षति हुई। प्रसिद्ध कवि-गीतकार और ‘बिहार गीत—मेरे भारत के कंठहार’ के रचयिता कवि शिरोमणि सत्यनारायण का 27 अगस्त की देर रात निधन हो गया। उन्होंने कदमकुआं स्थित अपने आवास पर 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है।



जेपी आंदोलन से लेकर बिहार गीत की रचना तक लंबा साहित्यिक सफर तय करने वाले कवि सत्यनारायण के निधन के साथ ही उनकी साहित्य साधना का सफर थम गया। वर्तमान में वे हिंदी प्रगति समिति, मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा विभाग) के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले वे वर्ष 1993 में बिहार सरकार की सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे।



कवि सत्यनारायण का जन्म 13 सितंबर 1935 को भोजपुर जिले के कौलोडिहरी गांव में हुआ था। उस समय यह इलाका शाहाबाद जिले का हिस्सा था। साहित्य के साथ-साथ सामाजिक और जन आंदोलनों से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। वर्ष 1974 में वे जेपी आंदोलन से जुड़े और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के करीबी माने जाते थे। लोक जागरण के उद्देश्य से फणीश्वरनाथ रेणु की अगुआई में आयोजित नुक्कड़ और चौराहों पर लगातार काव्य पाठ एवं संचालन भी करते रहे।



वर्ष 2012 में बिहार के शताब्दी वर्ष के अवसर पर कवि सत्यनारायण ने ‘बिहार गीत—मेरे भारत के कंठहार’ की रचना की थी। यह गीत आगे चलकर बिहार की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। इसके अलावा उन्होंने नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलगीत की भी रचना की थी। साहित्य और गीत लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।



उनके करीबी रहे लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने बताया कि सत्यनारायण पटना कॉलेजिएट के छात्र थे। वर्ष 1942 में उन्होंने काव्य पाठ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने ‘जयद्रथ वध’ की पंक्तियों का पाठ किया और उन्हें प्रतियोगिता में पुरस्कार मिला। यहीं से उनका साहित्य के प्रति गहरा लगाव पैदा हुआ, जो जीवनभर बना रहा।




इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन साहित्य और समाज के लिए समर्पित कर दिया और लगातार साहित्य की सेवा करते रहे। कवि सत्यनारायण के पुत्र संदीप ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह पटना के बांस घाट पर किया जाएगा।