Bihar Vishwamitra Path Road Project: बिहार में सड़क और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार गंगा किनारे बड़े पैमाने पर विकास कार्य करने जा रही है। राज्य सरकार ने गंगा तट के आसपास तीन नई फोर लेन सड़कों के निर्माण की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही सोन नदी पर एक नया पुल भी बनाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 5500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से पटना सहित कई जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
इसमें सबसे अहम परियोजना विश्वामित्र पथ है, जिसे मनेर से बक्सर तक बनाया जाएगा। लगभग 90 किलोमीटर लंबी यह फोर लेन सड़क गंगा किनारे बने बांध के सहारे विकसित की जाएगी। जहां-जहां बांध मौजूद नहीं है, वहां नया बांध बनाकर सड़क का निर्माण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह मार्ग पटना और बक्सर के बीच एक मजबूत वैकल्पिक कनेक्टिविटी साबित होगा।
यह सड़क पूरी तरह एट-ग्रेड होगी, यानी इसे एलिवेटेड नहीं बनाया जाएगा। इसी परियोजना के तहत सोन नदी पर एक नया पुल भी प्रस्तावित है, जिससे आवागमन और अधिक सुगम हो सके। बिहार राज्य पथ विकास निगम ने इसके लिए सर्वे एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 27 मई को प्री-बिड बैठक होगी और 10 जून तक एजेंसी का चयन करने का लक्ष्य रखा गया है। चयनित एजेंसी को छह महीने के भीतर सर्वे पूरा कर डीपीआर तैयार करनी होगी।
इसके अलावा सरकार गंगा किनारे तीन प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। इनमें विश्वामित्र पथ के साथ-साथ गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ शामिल हैं। गंगा-अंबिका पथ करीब 56 किलोमीटर लंबी होगी, जो बिदुपुर से दिघवारा को जोड़ेगी। वहीं नारायणी पथ लगभग 73.51 किलोमीटर लंबी होगी, जो गोपालगंज के दरिहारा से डुमरिया घाट तक जाएगी।
इन सभी परियोजनाओं को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है, जिसमें निजी कंपनियां निवेश करेंगी और टोल के जरिए लागत वसूलेंगी। इन सड़कों के बनने से गंगा किनारे बसे जिलों में व्यापार, पर्यटन और आवागमन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इधर जेपी गंगा पथ फेज-2 का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो दीघा से कोईलवर तक 35.65 किलोमीटर में बनाया जा रहा है। इसमें शेरपुर से कोईलवर तक सड़क बांध पर एट-ग्रेड फोर लेन होगी, जबकि दीघा से शेरपुर तक एलिवेटेड फोर लेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, इन परियोजनाओं पर करीब 5500 करोड़ रुपये खर्च होने हैं और लक्ष्य है कि अगले चार वर्षों में काम पूरा हो जाए। इनके बनने के बाद बिहार में सड़क संपर्क व्यवस्था काफी मजबूत होने और पटना से पश्चिमी जिलों तक यात्रा आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।