Bihar News : बिहार में बाढ़ की मार झेल रहे परिवारों के लिए राज्य सरकार ने राहत का बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में 9 अक्टूबर को 7-7 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता राशि भेजी जाएगी। यह रकम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे लाभुकों के खाते में पहुंचेगी। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को चिन्हित करने की प्रक्रिया के साथ राहत वितरण की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पश्चिम चंपारण समेत बाढ़ प्रभावित कई इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नदियों के जलस्तर, बाढ़ की स्थिति और सारण जिले के मकेर प्रखंड में टूटे तटबंध का जायजा लिया। हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर पहुंचे और वहां रह रहे प्रभावित लोगों से स्थिति की जानकारी ली।
सरकार के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ राहत सामग्री उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए चारा और आश्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
बाढ़ के कारण जिन परिवारों का जनजीवन प्रभावित हुआ है, उनके लिए सामुदायिक रसोई भी जारी रखने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई तब तक चलती रहनी चाहिए, जब तक लोग अपने घरों में वापस नहीं लौट जाते और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते।
बाढ़ राहत अभियान की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि के वितरण की तैयारियों की समीक्षा की गई। प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि पात्र परिवारों तक सहायता राशि समय पर पहुंच सके।
इससे पहले 15 सितंबर को भी राज्य में आठ लाख से अधिक बाढ़ प्रभावित लोगों के खातों में सहायता राशि भेजी गई थी। अब एक बार फिर प्रभावित परिवारों को 7 हजार रुपये देने की घोषणा की गई है। 9 अक्टूबर को होने वाला यह भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ की मौजूदा स्थिति के लिए नेपाल की तराई से आने वाले पानी को भी एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदियों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक अध्ययन कराया जा रहा है। खास तौर पर कोसी और महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि बाढ़ की स्थिति और उसके कारणों को समझकर लंबे समय के समाधान की दिशा में काम किया जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक, इस बार नेपाल की ओर से बड़ी मात्रा में पानी बिहार की नदियों में आया है। बगहा, रेवा घाट, लालगंज और गोपालगंज में नदियों के जलस्तर के उच्चतम स्तर तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। हालांकि सरकार का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों में कई इलाकों में पानी कम होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने का निर्देश दिया है। फिलहाल सरकार का फोकस प्रभावित परिवारों तक आर्थिक मदद, भोजन, राशन, पशु चारा और अन्य जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने पर है। 9 अक्टूबर को खातों में पहुंचने वाली 7 हजार रुपये की सहायता राशि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत के तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।