Bihar News: बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए राहत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को दूसरे चरण में 12 अक्टूबर को 7-7 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। यह रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। सरकार ने साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है, ताकि राहत के साथ-साथ पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम भी तेजी से कराया जा सके।


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को पटना स्थित लोक सेवक आवास में बाढ़ की स्थिति और उससे हुए नुकसान को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि बाढ़ से हुई क्षति और उसे दुरुस्त करने में आने वाले खर्च का प्रारंभिक आकलन जल्द तैयार किया जाए। सरकार का फोकस अब सिर्फ तत्काल राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद पैदा होने वाली समस्याओं से निपटने की तैयारी पर भी है।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित इलाकों से पानी निकलने के बाद वहां स्वास्थ्य, सड़क, आवागमन, कृषि और दूसरी जरूरी सेवाओं से जुड़ी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। ऐसे में पहले से ही आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बाढ़ का पानी उतरने के बाद लोगों को दूसरी परेशानियों का सामना न करना पड़े।


इस साल बिहार में गंगा, गंडक और सोन समेत कई प्रमुख नदियों में पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा पानी आया। इसके कारण राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी। सरकार के मुताबिक नदियों में गाद यानी सिल्ट जमा होना भी बाढ़ की प्रमुख वजहों में से एक है। बिहार सरकार ने नदी में जमा गाद की समस्या से निपटने के लिए गाद नीति भी बनाई है। मुख्यमंत्री ने नदियों की मौजूदा स्थिति और बाढ़ से हुए नुकसान की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया है।


समीक्षा बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बाढ़ के दोनों चरणों की स्थिति और उसके कारणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाढ़ के पहले चरण में गंगा, सोन, घाघरा, कोसी और पुनपुन नदियों में उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में भारी बारिश के कारण गंडक नदी में चार स्थानों पर उच्चतम जलस्तर रिकॉर्ड किया गया।


गंडक की बाढ़ ने पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सारण जिलों में भी परेशानी बढ़ाई। इन जिलों में छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त होने की जानकारी बैठक में दी गई। ऐसे में सरकार अब क्षति के आकलन के साथ-साथ तटबंधों और अन्य जरूरी ढांचों की मरम्मत पर भी जोर दे रही है।


आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने बैठक में बाढ़ के दौरान चलाए गए राहत और बचाव अभियानों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। सरकार का कहना है कि प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के साथ ही आने वाले दिनों में पुनर्वास और आवश्यक विकास कार्यों को भी गति दी जाएगी।


बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कृषि, ग्रामीण कार्य, डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भी अपने-अपने विभागों से जुड़ी क्षति और आगे की तैयारी को लेकर जानकारी दी।


अब बाढ़ प्रभावित परिवारों की नजर 12 अक्टूबर पर है। सरकार के दूसरे चरण की राहत के तहत 7-7 हजार रुपये की राशि खाते में पहुंचने से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, विभागों से मांगी गई नुकसान की रिपोर्ट के बाद सरकार के सामने बाढ़ से हुई कुल क्षति और पुनर्निर्माण की जरूरतों की तस्वीर भी और स्पष्ट हो सकेगी।