Bihar News : पटना में बाढ़ का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। गंगा और पुनपुन नदी का जलस्तर लाल निशान के पार पहुंचने के बाद राजधानी के कई इलाकों में हालात बिगड़ने लगे हैं। कहीं सड़क पानी के तेज बहाव में बह गई तो कहीं खेतों में खड़ी सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूब गई। बख्तियारपुर के दियारा क्षेत्र में पानी घुसने के बाद स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
पटना और आसपास के इलाकों में नदियों का बढ़ता जलस्तर अब ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहर के लिए भी चिंता बढ़ा रहा है। पड़ोसी राज्यों में लगातार हो रही बारिश और बाणसागर बराज तथा इंद्रपुरी जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा और पुनपुन के तेवर और तल्ख हो गए हैं। दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
कई इलाकों में पानी ने बढ़ाई मुश्किल
गंगा का पानी पटना से सटे बख्तियारपुर के दियारा इलाके के निचले हिस्सों में पहुंच गया है। पांच पंचायतों के कई गांव इसकी चपेट में हैं। जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए दियारा क्षेत्र के स्कूलों को बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों को नदी और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
बख्तियारपुर प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए नौ स्थानों पर राहत शिविर के लिए जगह चिह्नित की है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पुनपुन के उफान से गांव और खेत प्रभावित
पुनपुन नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। बुधवार दोपहर नदी का जलस्तर खतरे के निशान 50.60 मीटर से बढ़कर 52.62 मीटर तक पहुंच गया। इसके बाद चामोचक, फहीमचक, बड़हिया कोल और लोदीपुर समेत कई इलाकों के खेतों में पानी फैल गया।
सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। निचले इलाकों में लगी धान की फसल पानी में डूब गई है। पुनपुन और दरधा नदी के दबाव ने कई ग्रामीण रास्तों को भी प्रभावित किया है।
50 फीट सड़क पानी में बही
बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटना-गया मुख्य सड़क से गौरीचक के चंदासी और बाकरचक की ओर जाने वाली करीब 50 फीट ग्रामीण सड़क दरधा नदी के तेज दबाव में बह गई। सड़क टूटने से ग्रामीणों के आवागमन पर असर पड़ा है।
फतुहा और दनियावां प्रखंड में भी पुनपुन, महात्माइन और धोबा नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी फैल गया है। डुमरी और मौजीपुर पंचायत के कई गांव प्रभावित हुए हैं। दौलतपुर के पास सड़क पर करीब छाती तक पानी बहने की स्थिति बताई गई है। इन इलाकों में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई है।
दानापुर-मनेर में भी बढ़ी चिंता
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ दानापुर और मनेर के निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से उसके आसपास रहने वाले ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गई है।
स्थिति को देखते हुए पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। संवेदनशील तटबंधों की 24 घंटे निगरानी करने और कटाव या रिसाव की स्थिति में तत्काल मरम्मत की व्यवस्था रखने को कहा गया है।
तटबंधों पर बढ़ाई गई तैयारी
प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर ईसी बैग, नाइलोन क्रेट, ट्रैक्टर, जेनरेटर और अन्य जरूरी बाढ़ सुरक्षा सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा है। जरूरत पड़ने पर तत्काल काम के लिए मजदूरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर 24 घंटे नियंत्रण कक्ष सक्रिय किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अफवाहों पर भरोसा न करें।
राहत शिविरों में इन सुविधाओं की तैयारी
संभावित बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों में पेयजल, शौचालय, भोजन और दवाओं की व्यवस्था की जा रही है। सामुदायिक रसोई और चिकित्सा शिविर चलाने की तैयारी है। सर्पदंश और कुत्ते के काटने की दवाओं के साथ जरूरी जीवनरक्षक दवाएं भी उपलब्ध रखने को कहा गया है।
प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पशु शिविर, पशु चारा और जरूरी दवाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
फिलहाल पटना में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन और ग्रामीणों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ता है या राहत मिलती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।