Bihar News : बिहार में नेपाल की भारी बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। गंडक नदी ने पश्चिम चंपारण से लेकर गोपालगंज और सारण तक बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से रविवार रात 10 बजे करीब 5.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह मात्रा अगस्त में नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के दौरान दर्ज जलप्रवाह से भी दोगुने से अधिक बताई जा रही है। गंडक के उफान के कारण पश्चिम चंपारण के बगहा और बेतिया के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। हालात को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अपने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया है।
नेपाल में लगातार बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार सुबह 11 बजे वाल्मीकिनगर बराज पर 4.24 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया था। इसके बाद महज सात घंटे में जलप्रवाह में करीब 77 हजार क्यूसेक की बढ़ोतरी हो गई। रात तक यह आंकड़ा 5.19 लाख क्यूसेक पहुंच गया। इससे पहले वर्ष 2024 में गंडक नदी में 5.62 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया था।
पश्चिम चंपारण जिले में बाढ़ का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। बगहा शहर के साथ बेतिया के सौ से अधिक गांवों में पानी घुसने की खबर है। वाल्मीकिनगर, बगहा-1, बगहा-2, पिपरासी, मधुबनी, ठकराहा, भितहा, योगापट्टी, बैरिया और नौतन के दियारा क्षेत्रों में सैकड़ों घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई जगहों पर खेतों और सड़कों पर पानी फैल गया है। बगहा-वाल्मीकिनगर सड़क पर भी बाढ़ का पानी चढ़ गया है, जिससे आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।
बाढ़ का असर जंगलों तक पहुंच गया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के कई हिस्सों में पानी फैलने के कारण जंगली जानवर जंगल से बाहर निकलकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। मधुबनी प्रखंड के चिउरही पंचायत के रवहिया गांव में लोग बाढ़ से बचने के लिए ऊंचे स्थानों पर जाने लगे हैं। वहीं, पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड के तटवर्ती इलाकों में गंडक का पानी खेतों में फैलने लगा है। भिसवा-मझौरा सड़क पर भी पानी चढ़ गया है।
गंडक के साथ-साथ कोसी और बागमती नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा और पूर्वी चंपारण के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। कोसी बराज से रविवार को 2.23 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया। दरभंगा के किरतपुर प्रखंड के करीब आधा दर्जन गांवों में पानी घुस गया है। सुपौल के किशनपुर और सरायगढ़ इलाके में भी कोसी का पानी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
भारत-नेपाल सीमा पर सोनबरसा-मलंगवा सड़क के चेकपोस्ट के पास नो मेंस लैंड क्षेत्र में करीब तीन फीट पानी बह रहा है। इससे सीमावर्ती इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, सुपौल और पश्चिम चंपारण के 11 प्रखंडों में करीब 82 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
गंडक के बढ़ते जलस्तर के बीच गोपालगंज और सारण में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गोपालगंज सदर प्रखंड के खाप मकसूदपुर, जागिरि टोला, मेंहदिया और रामनगर सहित कई गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। डुमरियाघाट में गंडक नदी खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सारण जिले के मकेर प्रखंड के लगुनिया, बाघाकोल पोखरा, हैजलपुर और नौकाडा समेत करीब एक दर्जन गांव पानी से घिर गए हैं।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने चंपारण से वैशाली तक तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है। संबंधित जिलों के अंचलाधिकारियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि गंडक नदी के दोनों तटबंधों पर अतिरिक्त अभियंताओं की तैनाती की गई है। सभी अभियंताओं को 24 घंटे निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री के अनुसार, फिलहाल गंगा का जलस्तर कम रहने के कारण गंडक के पानी की निकासी गंगा में सुचारू रूप से होने की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। हालांकि, नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर और कई जिलों में बाढ़ के फैलाव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।