Bihar School News : बिहार में हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले सरकारी स्कूलों के लिए अब स्थायी समाधान की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार बाढ़ से ध्वस्त होने वाले विद्यालयों के पुनर्निर्माण के लिए एक अलग कोष बनाने पर विचार कर रही है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार से नियमित रूप से राशि उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी, ताकि बाढ़ के बाद स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जा सके।

बिहार शिक्षा विभाग इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही शिक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा। विभाग का मानना है कि हर साल बाढ़ आने के बाद बड़ी संख्या में स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में तत्काल राशि की व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और भवन निर्माण में काफी समय लग जाता है।

केंद्र के सामने रखा जाएगा स्थायी फंड का प्रस्ताव

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री के सामने शुरुआती चर्चा भी हो चुकी है। अब विभाग इस बात का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है कि बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के लिए केंद्र सरकार की ओर से नियमित रूप से एक निश्चित राशि का प्रावधान किया जाए।

अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो बाढ़ के बाद स्कूलों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को अलग से इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राशि उपलब्ध रहने से निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जा सकेगा और बच्चों की पढ़ाई बाधित होने की स्थिति कम होगी।

अभी राज्य सरकार अपने स्तर पर करती है व्यवस्था

फिलहाल बाढ़ में स्कूल भवनों के क्षतिग्रस्त होने के बाद पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार अपने स्तर से राशि की व्यवस्था करती है। इस प्रक्रिया में कई बार समय लग जाता है। विभाग का मानना है कि एक स्थायी कोष बनने से आपदा के समय राहत और पुनर्निर्माण दोनों काम तेजी से किए जा सकेंगे।

शिक्षा विभाग के पास पहले से ही अपना निर्माण निगम है, जो स्कूलों के भवन निर्माण और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों को संभालता है। स्कूल भवन किस मॉडल के आधार पर बनाए जाएंगे और निर्माण पर कितना खर्च आएगा, इसकी पूरी व्यवस्था पहले से मौजूद है। ऐसे में अगर फंड की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाती है तो निर्माण कार्य को गति मिल सकती है।

2017 और 2020 की बाढ़ में टूटे स्कूलों के लिए भी मांगी जाएगी राशि

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि सरकार 2017 और 2020 में आई भीषण बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए स्कूल भवनों के लिए भी केंद्र सरकार से सहायता राशि की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित विद्यालयों की सूची तैयार कर केंद्र को भेजी जाएगी। इसके बाद केंद्र से मिलने वाली राशि के आधार पर उन स्कूलों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जो लंबे समय से क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं। इन वर्षों में आई बाढ़ ने बिहार के कई जिलों में स्कूलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। कई जगहों पर भवनों की दीवारें टूट गई थीं, फर्नीचर खराब हो गया था और बच्चों की पढ़ाई लंबे समय तक प्रभावित रही थी।

भवनहीन स्कूलों के लिए भी सरकार की तैयारी

इसके अलावा राज्य सरकार अपनी निधि से भी नए स्कूल भवन बनाने की तैयारी कर रही है। शिक्षा विभाग ने जिलों से ऐसे विद्यालयों की सूची मांगी है, जिनके पास अपना भवन नहीं है और जिन्हें फिलहाल आसपास के दूसरे स्कूलों के साथ टैग किया गया है।सरकार का लक्ष्य है कि सभी बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिले और किसी भी छात्र को भवन की कमी के कारण परेशानी न हो।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

बिहार में हर साल गंगा, कोसी, गंडक और अन्य नदियों के जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों पर पड़ता है। कई बार स्कूल भवन राहत शिविरों में बदल दिए जाते हैं और कई जगह बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी स्कूलों को दोबारा शुरू करने में समय लगता है। स्थायी फंड की व्यवस्था होने से ऐसे इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को जल्दी पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि आपदा के समय बच्चों की पढ़ाई जारी रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेती है। अगर बिहार की यह पहल सफल होती है तो बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए स्कूल पुनर्निर्माण का एक नया मॉडल तैयार हो सकता है।