भागलपुर: बिहार में लगातार बढ़ रहे बाढ़ के खतरे के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को भागलपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को नदियों के बढ़ते जलस्तर, कटाव और तटबंधों की सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित संसाधन विभाग मिलकर बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल कई नदियों में जलप्रवाह बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन की नजर गंगा के साथ-साथ सोन, कोसी और गंडक नदी के जलस्तर एवं प्रवाह पर भी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि सोन नदी से करीब 6.30 लाख क्यूसेक पानी आने की बात सामने आई है, जबकि कोसी और गंडक नदी से भी लगातार पानी गंगा में पहुंच रहा है। इसके अलावा गंगा नदी में पहले से ही काफी मात्रा में पानी मौजूद है। ऐसे में आने वाले समय में स्थिति पर लगातार निगरानी रखना बेहद जरूरी है।

कटाव रोकने के लिए सरकार गंभीर

भागलपुर में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के दौरान मुख्यमंत्री ने कटाव की समस्या को लेकर भी सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अभी प्रशासन ने कई जगहों पर कटाव को रोकने का काम किया है और आगे भी जरूरत के अनुसार काम जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाढ़ के दौरान सिर्फ जलस्तर बढ़ना ही चुनौती नहीं है, बल्कि नदी के तेज बहाव के कारण होने वाला कटाव भी बड़ी समस्या बन जाता है। कटाव की वजह से सड़क, खेत, घर और अन्य सरकारी एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए संवेदनशील स्थानों पर पहले से तैयारी और लगातार निगरानी जरूरी है।

कोसी, गंडक और सोन के बहाव पर भी नजर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि कोसी नदी के बहाव को व्यवस्थित करने के साथ-साथ गंडक और सोन नदी के प्रवाह की भी लगातार निगरानी की जाएगी। इन नदियों से आने वाला पानी गंगा के जलस्तर को प्रभावित करता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रमुख नदियों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और जलप्रवाह में अचानक बढ़ोतरी होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। सरकार का उद्देश्य बाढ़ के संभावित खतरे को समय रहते पहचानना और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की तैयारी को मजबूत रखना है।

गंगा नदी के लिए भी बनेगी दीर्घकालिक योजना

मुख्यमंत्री ने गंगा नदी को लेकर भी एक महत्वपूर्ण योजना का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के एंबैंकमेंट यानी तटबंध व्यवस्था को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने की जरूरत है। इसके लिए नदी के बहाव और उसके आसपास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, कई स्थानों पर एंबैंकमेंट का क्षेत्र लगभग 20 से 26 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसकी चौड़ाई और संरचना को व्यवस्थित करने के साथ-साथ नदी के बहाव को नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से बनाए रखने की दिशा में काम किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां आवश्यकता हो, वहां एंबैंकमेंट की संरचना को मजबूत किया जाए और नदी के बहाव के लिए पर्याप्त स्पेस की व्यवस्था की जाए। इस क्रम में नदी के बीच ड्रेजिंग की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है।

ड्रेजिंग से नदी के बहाव को बेहतर करने की तैयारी

गंगा में ड्रेजिंग की व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। ड्रेजिंग के जरिए नदी में जमा गाद और अन्य अवरोधों को हटाकर जलप्रवाह को बेहतर करने की कोशिश की जाएगी।सरकार का मानना है कि यदि नदी के बहाव वाले हिस्से को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित किया जाए तो बाढ़ के समय पानी के दबाव को नियंत्रित करने और संवेदनशील इलाकों में कटाव के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यह केवल मौजूदा बाढ़ की स्थिति से निपटने की कवायद नहीं है, बल्कि भविष्य में बाढ़ और कटाव की समस्या को कम करने के लिए भी दीर्घकालिक कदम उठाए जाएंगे।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

बिहार में इस समय गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। सोन, कोसी और गंडक से आने वाला पानी गंगा के जलप्रवाह को और प्रभावित कर रहा है। ऐसे में भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे कई इलाकों में प्रशासन की चिंता बढ़ी हुई है।

मुख्यमंत्री के भागलपुर दौरे को इसी बढ़ते बाढ़ संकट के बीच काफी अहम माना जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जमीनी स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों से राहत, बचाव, कटाव नियंत्रण तथा तटबंधों की सुरक्षा को लेकर जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं। नदियों के जलस्तर और बहाव में होने वाले हर बदलाव पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संवेदनशील इलाकों में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखी जाए।

सरकार का फोकस: तत्काल राहत के साथ स्थायी समाधान

मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि बिहार सरकार अब बाढ़ के दौरान तत्काल राहत और बचाव के साथ-साथ नदियों के बहाव और कटाव की समस्या के स्थायी समाधान पर भी जोर देना चाहती है।गंगा, कोसी, गंडक और सोन जैसी प्रमुख नदियों के बहाव को व्यवस्थित करने, तटबंधों को मजबूत करने और जरूरत के अनुसार ड्रेजिंग कराने की योजना आने वाले समय में बाढ़ प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।भागलपुर में मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद अब अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते जलप्रवाह के बीच संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखना और किसी भी आपात स्थिति में लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाना है।