Bihar News : नेपाल में लगातार हो रही बारिश का असर अब बिहार की नदियों पर साफ दिखाई देने लगा है। कोसी और गंडक के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से उत्तर बिहार के कई इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा गहरा गया है। पश्चिम चंपारण से लेकर सीमांचल तक प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। कई गांवों में पानी घुसने लगा है, जबकि कुछ इलाकों का सड़क संपर्क भी टूट गया है। राज्य के 17 जिलों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।


सबसे ज्यादा चिंता कोसी और गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। वीरपुर बराज पर शुक्रवार रात आठ बजे कोसी का जलस्राव 2 लाख 81 हजार 795 क्यूसेक दर्ज किया गया था। शनिवार सुबह पांच बजे यह बढ़कर 3 लाख 13 हजार 595 क्यूसेक पहुंच गया। हालांकि शाम तक इसमें कुछ कमी आई और जलस्राव करीब 3 लाख 400 क्यूसेक दर्ज किया गया। इस साल अब तक यह कोसी का सबसे अधिक जलस्तर बताया गया है।


उधर, गंडक नदी में भी पानी तेजी से बढ़ा है। वाल्मीकिनगर बराज से शुक्रवार रात करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी गुजर रहा था। शनिवार सुबह आठ बजे यह बढ़कर 2 लाख 73 हजार क्यूसेक हो गया और शाम चार बजे तक यह आंकड़ा 2 लाख 98 हजार क्यूसेक से भी ऊपर पहुंच गया। नदी के जलस्तर में इस अचानक बढ़ोतरी ने तटवर्ती इलाकों की चिंता बढ़ा दी है।


पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर इलाके में गंडक का पानी कई गांवों तक पहुंच गया है। रोहुआ टोला, चकदहवा और झंडू टोला समेत आसपास के इलाकों में लोगों को पानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है। रामनगर के दोन क्षेत्र में स्थिति और मुश्किल हो गई है। नौरंगिया दोन और बनकटवा करमहिया पंचायत के 22 गांवों का सड़क संपर्क दोबारा टूट गया है। इससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है।


पूर्वी चंपारण में भी गंडक और बूढ़ी गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लालबेगिया में सिकरहना नदी का पानी बढ़ रहा है, जबकि अहिरौलिया में बूढ़ी गंडक के जलस्तर में भी वृद्धि शुरू हो गई है। सीतामढ़ी में बागमती नदी का जलस्तर ऊपर जाने से निचले इलाकों में चिंता बढ़ी है।


मधुबनी और दरभंगा के दियारा क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर बढ़ता जा रहा है। मधुबन प्रखंड की चिऊरही समेत निचले इलाकों के ग्रामीणों से जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की गई है। प्रशासन की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।


नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तैयारी रखने और लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।


सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है। आपात स्थिति में मदद के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने टोल-फ्री नंबर 1070 जारी किया है।


इस बीच सीमांचल को बाढ़ से बचाने के लिए प्रस्तावित महानंदा नदी बाढ़ प्रबंधन योजना फेज-दो भी चर्चा में आ गई है। करीब 198.37 किलोमीटर तटबंध निर्माण वाली इस योजना पर वर्ष 2018 में काम शुरू करने की प्रक्रिया हुई थी। योजना के लिए 1940.45 एकड़ जमीन की जरूरत थी, लेकिन आठ साल में केवल 62.37 एकड़ जमीन ही अधिग्रहित हो सकी। यही वजह है कि करीब 198 किलोमीटर प्रस्तावित तटबंध में अब तक सिर्फ 1.04 किलोमीटर का निर्माण हो पाया है।


भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण निर्माण एजेंसी के साथ हुए समझौते को खत्म करने का फैसला लिया जा रहा है। अब विभाग इस परियोजना को नए सिरे से शुरू करने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक पहले 80 फीसदी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और उसके बाद नए सिरे से टेंडर जारी किया जाएगा।


अगर नेपाल में बारिश का दौर जारी रहता है और नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता है तो उत्तर बिहार के निचले इलाकों में परेशानी और बढ़ सकती है। फिलहाल प्रशासन की नजर नदियों के जलस्तर, तटबंधों और प्रभावित गांवों पर बनी हुई है।