PATNA: बिहार में वर्ष 2026 के दौरान आई बाढ़ से प्रभावित कृषि योग्य भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों को राहत देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बाढ़ के कारण खेतों और मछली पालन वाले क्षेत्रों में बालू, रेत और गाद जमा होने से कृषि एवं मत्स्य पालन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इस समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।


विभाग की ओर से जारी पत्र में प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय सत्यापन कराने और वहां जमा बालू, रेत एवं गाद की मात्रा का आकलन करने को कहा गया है। सत्यापन के बाद निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता राशि की मांग की जाएगी, ताकि प्रभावित जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने और मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों को सामान्य करने में मदद मिल सके।


22 जिलों के डीएम को निर्देश

आपदा प्रबंधन विभाग ने इस संबंध में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सुपौल और सहरसा के जिला पदाधिकारियों को पत्र लिखा है।


इन जिलों में बाढ़ से प्रभावित कृषि योग्य भूमि और मत्स्य प्रक्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक जानकारी जुटाने को कहा गया है। इसके आधार पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के निर्धारित सहायता मानकों के तहत राशि की मांग की जाएगी।


किसानों और मत्स्य पालकों को राहत की उम्मीद

बाढ़ के बाद खेतों में बालू और गाद जमा होने से खेती करना मुश्किल हो जाता है। इसी तरह मत्स्य प्रक्षेत्रों में भी गाद और रेत का जमाव मछली पालन की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों का आकलन और सहायता राशि की मांग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राहत कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर की जा रही इस पहल का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र को फिर से सामान्य स्थिति में लाने में सहायता करना है।