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20-Dec-2025 04:53 PM
By First Bihar
Bihar Road Authority : बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक और महत्वाकांक्षी निर्णय लेते हुए राज्य में पांच एक्सप्रेस-वे का निर्माण स्वयं करने का फैसला किया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब बिहार सरकार एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए केंद्र सरकार पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगी। इस परियोजना के माध्यम से न केवल राज्य में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और व्यापारिक नेटवर्क में भी तेजी आएगी।
सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर एक विशेष एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के गठन पर विचार शुरू कर दिया है। यह अथॉरिटी एक्सप्रेस-वे निर्माण की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी का काम करेगी। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम सात निश्चय-3 योजना के तहत उठाया जा रहा है। प्रारंभिक बैठक पथ निर्माण विभाग के स्तर पर हो चुकी है, जिसमें यह तय किया गया कि किन क्षेत्रों में एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जाएगा और उनकी लंबाई कितनी होगी।
बिहार में पहले से ही कुछ एक्सप्रेस-वे निर्माण की केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस वे, रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस वे, वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेस वे और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस वे का निर्माण होना तय है। इनमें से वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस वे को अब एक्सप्रेस वे नंबर भी मिल चुका है। शेष दो एक्सप्रेस वे के एलायनमेंट (मार्ग निर्धारण) का काम हो चुका है और वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
हालांकि, बिहार सरकार अब इन क्षेत्रों से अलग भी एक्सप्रेस-वे निर्माण के विकल्पों पर विचार कर रही है। पथ निर्माण विभाग इस संबंध में उच्च स्तर पर योजना प्रस्तुत करेगा, जिसमें प्रत्येक एक्सप्रेस वे के मार्ग और तकनीकी विवरण शामिल होंगे।
बिहार में सड़क निर्माण के लिए पहले भी अलग निगम का गठन हो चुका है। उदाहरण के लिए, एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की ऋण राशि से स्टेट हाइवे निर्माण के लिए बिहार राज्य पथ विकास निगम (बीएसआरडीसी) का गठन किया गया था। बीएसआरडीसी ने एडीबी की अप्रेजल से लेकर निविदा निष्पादन तक की पूरी प्रक्रिया संभाली। उसी मॉडल के तहत एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए भी एक अलग अथॉरिटी बनाई जाएगी। इस अथॉरिटी के माध्यम से वित्तीय संस्थाओं और निवेशकों की मदद से परियोजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जाएगा।
राज्य सरकार की योजना के अनुसार, एक्सप्रेस-वे निर्माण में हाईब्रिड एन्युटी मोड का भी उपयोग किया जा सकता है। इस मॉडल में निर्माण कंपनी प्रारंभ में निर्माण लागत का 60 प्रतिशत निवेश करती है। बाद में टोल या अन्य माध्यमों से इस निवेश की वापसी होती है। इससे सरकार पर वित्तीय दबाव कम होगा और निर्माण कार्य तेज़ी से पूरा होगा।
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए अलग अथॉरिटी बनाने का उद्देश्य यह है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित हो। इसके साथ ही राज्य में सड़क और परिवहन नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए यह कदम बेहद अहम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में एक्सप्रेस-वे के निर्माण से राज्य की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। व्यापार, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में यह परियोजना विशेष रूप से फायदेमंद होगी। एक्सप्रेस-वे के बनने से न केवल लोगों के यात्रा समय में कटौती होगी, बल्कि माल-वाहन संचालन की लागत में भी कमी आएगी।
पथ निर्माण विभाग ने बताया कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और तकनीकी डिजाइन जैसे सभी चरणों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बिहार सरकार इस परियोजना को केंद्र की योजनाओं से अलग अपनी व्यवस्था के तहत क्रियान्वित करेगी।
इस पहल से यह भी स्पष्ट हो गया है कि बिहार राज्य अब बड़े बुनियादी ढांचे (infrastructure) प्रोजेक्ट्स में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। एक्सप्रेस-वे के निर्माण से राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण कार्य, संचालन और रख-रखाव से जुड़े कई पद सृजित होंगे, जिससे स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा।
बिहार में एक्सप्रेस-वे निर्माण की इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि परियोजना के हर चरण में तकनीकी विशेषज्ञ, वित्तीय संस्थान और निर्माण कंपनियों का समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। यह परियोजना राज्य में आधुनिक सड़क परिवहन नेटवर्क की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
इस प्रकार, बिहार सरकार का यह निर्णय राज्य की सड़क कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक्सप्रेस-वे के निर्माण से पटना, पूर्णिया, रक्सौल, हल्दिया, रांची और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होगी, जिससे व्यवसाय और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।