पटना: बिहार विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक ने ही राज्य में किसानों को हो रही बिजली आपूर्ति की समस्या का मुद्दा उठाया। विधायकों ने कहा कि कई इलाकों में किसानों को समय पर बिजली नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।


उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब राज्य में बारिश कम हुई है और किसान पहले से परेशान हैं, ऐसे समय में खेतों तक पर्याप्त बिजली पहुंचाने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है। किसानों को फसल बचाने के लिए सिंचाई की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन बिजली संकट के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


विधायक सवालों के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद सदन में जवाब देने के लिए खड़े हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने माना कि इस बार राज्य के कई हिस्सों में बारिश कम हुई है, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और किसानों को राहत देने के लिए कई स्तर पर काम किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में बताया कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के हित में बिजली आपूर्ति को लेकर विशेष व्यवस्था बनाई है। इसके तहत सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक लगातार बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसान अपने खेतों में समय पर पानी पहुंचा सकें और फसल को नुकसान से बचाया जा सके।


सीएम ने कहा कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर होती है। इस बार कम बारिश की वजह से कई क्षेत्रों में किसानों को परेशानी हो रही है। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि बिजली और अन्य संसाधनों की कमी के कारण किसानों की फसल प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि सिंचाई के लिए बिजली व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।


मुख्यमंत्री ने सूखे की स्थिति को लेकर भी बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने कहा कि जिन-जिन इलाकों में बारिश की कमी के कारण सुखाड़ जैसी स्थिति बन रही है, वहां के जिलाधिकारियों को रिपोर्ट तैयार कर भेजने का निर्देश दिया गया है। जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार तत्काल कदम उठाएगी और प्रभावित किसानों को राहत देने का काम करेगी।


उन्होंने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में सूखे की स्थिति सामने आती है तो वहां किसानों को डीजल अनुदान देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे किसान डीजल पंप के माध्यम से खेतों की सिंचाई कर सकेंगे और अपनी फसलों को बचाने में मदद मिलेगी।


मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष ने सरकार की किसान हितैषी नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार लगातार किसानों के लिए काम कर रही है। वहीं विपक्ष ने भी मांग की कि बिजली आपूर्ति की व्यवस्था को जमीन पर मजबूत किया जाए ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।


बिहार में इस साल कम बारिश के कारण कई जिलों में खेती को लेकर चिंता बढ़ी है। धान समेत खरीफ फसलों की बुआई और सिंचाई के लिए किसानों को पानी की जरूरत है। ऐसे में सरकार की ओर से बिजली आपूर्ति बढ़ाने और डीजल अनुदान देने की घोषणा को किसानों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।


अब जिलों से आने वाली रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि किन इलाकों में सूखे की स्थिति है और किन किसानों को डीजल अनुदान का लाभ मिलेगा। सरकार का दावा है कि किसानों की फसल बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।