Bihar Fake Passport Case: मुजफ्फरपुर में फर्जी आधार कार्ड के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनवाने वाले रैकेट के मुख्य आरोपित एजाज कमर को पुलिस ने पटना से गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, एजाज आधार से जुड़े काम के लिए वेंडर के तौर पर काम करता था और इसी की आड़ में फर्जीवाड़े का नेटवर्क चला रहा था. जांच में उसके कई राज्यों से जुड़े संपर्क सामने आए हैं.


सिटी एसपी मो. मोहिबुल्लाह अंसारी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एजाज की गिरफ्तारी की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एजाज की पत्नी और परिवार के कुछ सदस्य लंदन में रहते हैं. इसी वजह से पुलिस अब उसके कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच कर रही है.


फर्जी आधार से बनवाया बांग्लादेशी नागरिक का पासपोर्ट

पुलिस के अनुसार, गिरोह फर्जी तरीके से आधार कार्ड तैयार करता था और उसके आधार पर बिहार के पते का इस्तेमाल कर बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाते थे. मामले की जांच के दौरान मुजफ्फरपुर के मोतीझील स्थित कन्हाई कम्युनिकेशन में छापेमारी की गई थी. यहां से लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान बरामद किए गए थे.


छापेमारी के दौरान साहिल कुमार को गिरफ्तार किया गया था. उससे पूछताछ के बाद सारण जिले के शिव कुमार पंडित को पकड़ा गया. इसके बाद शनिवार को सुजीत नामक एक अन्य आरोपित की गिरफ्तारी हुई. एजाज की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अब तक चार आरोपितों को पकड़ा जा चुका है. सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.


पुलिस पूछताछ में एजाज ने बताया कि उसने एमटेक की पढ़ाई की है. नौकरी छोड़ने के बाद वह आधार से जुड़े काम में आ गया और बाद में वेंडर के तौर पर काम करने लगा. पुलिस के अनुसार, इसी काम के दौरान उसने फर्जीवाड़े का नेटवर्क तैयार किया.


पुलिस का कहना है कि एजाज आधार अपडेट से जुड़े काम का ठेका लेता था. इसके तहत वह आधार से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऑपरेटर उपलब्ध कराता था. ऑपरेटरों से हर महीने करीब 30 हजार रुपये लिए जाते थे.


पुलिस की पूछताछ में यह भी जानकारी सामने आई है कि एजाज चंडीगढ़ से अपने नेटवर्क का संचालन करता था. उसके संपर्क कई राज्यों में होने की बात सामने आई है. पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड और अलग-अलग राज्यों में उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है.


इस मामले में पुलिस ने अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी आधार और पासपोर्ट बनवाने के इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं और अब तक कितने दस्तावेज तैयार किए गए हैं.