Bihar Expressway : वाराणसी से रांची और फिर कोलकाता जाने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। आने वाले समय में जिस सफर को पूरा करने में अभी 10 से 12 घंटे तक का वक्त लग जाता है, वही दूरी करीब छह घंटे में पूरी की जा सकेगी। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे, जो पूर्वी भारत के चार राज्यों के बीच सड़क कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने जा रहा है।
भारतमाला परियोजना के तहत तैयार हो रहे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से सिर्फ सफर का समय ही कम नहीं होगा, बल्कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच कारोबार, माल ढुलाई, पर्यटन और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। एक्सप्रेसवे का करीब 161 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा, जबकि गया जिले में भी इसका बड़ा हिस्सा निर्माणाधीन है।
शुक्रवार को गया के इमामगंज प्रखंड के बतेसा स्थित परियोजना कैंप में मीडिया टूर के दौरान एनएचएआई औरंगाबाद के परियोजना निदेशक देवेंद्र कुमार बंसल ने परियोजना की प्रगति और इसकी तकनीकी खूबियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसका उद्देश्य चार राज्यों के बीच तेज, सुरक्षित और सुगम आवागमन तैयार करना है।
गया जिले में एक्सप्रेसवे का करीब 33.5 किलोमीटर लंबा हिस्सा बनाया जा रहा है। इस हिस्से के निर्माण पर 1248.37 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक करीब एक साल में इस पैकेज का लगभग 35 फीसदी काम पूरा हो चुका है।इस हिस्से का निर्माण जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड कर रही है और इसे दिसंबर 2027 के अंत तक पूरा किए जाने की संभावना है। परियोजना के पूरा होने के बाद गया समेत आसपास के इलाकों को भी बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा।
वाराणसी से कोलकाता तक प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 672 किलोमीटर होगी। छह लेन का यह एक्सप्रेसवे ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा। यानी तेज रफ्तार वाहनों के लिए इसे आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को सीधे बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ ट्रकों और दूसरे व्यावसायिक वाहनों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। खासकर माल ढुलाई में समय की बचत होने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
गया जिले में एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहेगा। यहां यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए 12 पुल बनाए जाएंगे। इनमें तीन बड़े और नौ छोटे पुल शामिल हैं।इसके अलावा आठ फ्लाईओवर, 19 वाहन अंडरपास, एक इंटरचेंज और एक टोल प्लाजा भी प्रस्तावित है। यात्रियों के लिए दो रेस्ट एरिया बनाए जाने की योजना है। यानी लंबी दूरी के सफर में यात्रियों को जरूरी सुविधाएं भी एक्सप्रेसवे के किनारे मिल सकेंगी। परियोजना की खास बात यह है कि वन्यजीवों की आवाजाही को भी ध्यान में रखा गया है। इसके लिए दो हाथी अंडरपास और दो एनिमल ओवरपास बनाने का प्रावधान किया गया है।
एक्सप्रेसवे निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण की योजना भी तैयार की गई है। गया जिले में सड़क के किनारे करीब 50 हजार पौधे लगाए जाने का प्रस्ताव है। वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए वन विभाग और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के सहयोग से यह योजना तैयार की गई है। एनएचएआई की ओर से इसके लिए वन विभाग को करीब 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक सड़क निर्माण में टिकाऊपन पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। एक्सप्रेसवे की ढलाई तीन परतों में की जा रही है, ताकि सड़क लंबे समय तक मजबूत बनी रहे।
परियोजना के पूरा होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक का सफर सिर्फ छोटा और तेज नहीं होगा, बल्कि बिहार के गया जैसे इलाकों के लिए विकास, पर्यटन, कारोबार और रोजगार के नए अवसरों का रास्ता भी खोल सकता है। आने वाले वर्षों में यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की सड़क कनेक्टिविटी का एक अहम कॉरिडोर बन सकता है।