Bihar News: बिहार में अब इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बड़ा नेटवर्क तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर हर 50 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना बनाई है।
परिवहन विभाग ने इस दिशा में काम तेज कर दिया है। योजना के तहत निजी एजेंसियों की मदद से चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए बिल्ड, ऑपरेट और मेंटेन (BOM) मॉडल अपनाया जाएगा। यानी चयनित एजेंसियां अपने खर्च से चार्जिंग स्टेशन बनाएंगी, आधुनिक मशीनें लगाएंगी और लंबे समय तक उनका संचालन व रखरखाव भी करेंगी।
पूरे बिहार में तैयार होगा चार्जिंग नेटवर्क
अभी इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग सुविधा की कमी मानी जाती है। इसी को देखते हुए सरकार राज्य के अलग-अलग हिस्सों को चार्जिंग नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी कर रही है।
यह सुविधा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हाईवे, जिला मुख्यालय, पर्यटन स्थल, बस पड़ाव, होटल, ढाबे, मॉल और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर भी चार्जिंग केंद्र विकसित किए जाएंगे।
परिवहन विभाग पहले संभावित जगहों की पहचान करेगा। इसके बाद चयनित कंपनियां वहां वाहनों की संख्या, बिजली उपलब्धता, पार्किंग व्यवस्था और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सर्वे करेंगी।
फास्ट चार्जर से कम समय में होगी बैटरी चार्ज
नई योजना में सामान्य चार्जर के साथ-साथ फास्ट चार्जर और उच्च क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे दोपहिया, तीनपहिया, कार, बस और व्यावसायिक वाहनों को आसानी से चार्जिंग सुविधा मिल सकेगी।
शहरी क्षेत्रों में अधिक इस्तेमाल वाले चार्जिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे, जबकि हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों की सुविधा के अनुसार स्टेशन विकसित होंगे।
सुरक्षा मानकों का रखा जाएगा ध्यान
सरकार ने चार्जिंग स्टेशन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी विशेष निर्देश दिए हैं। सभी केंद्र राष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाए जाएंगे। इनमें बिजली सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, पार्किंग और यातायात प्रबंधन की सुविधाएं शामिल होंगी।
चार्जिंग सेवा के लिए शुल्क भी निर्धारित नियमों के अनुसार रखा जाएगा, जबकि बिजली और संचालन का खर्च संबंधित एजेंसियां संभालेंगी।
2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का लक्ष्य
बिहार सरकार ने वर्ष 2030 तक नए वाहन पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सरकार का मानना है कि बेहतर चार्जिंग नेटवर्क तैयार होने से लोगों का भरोसा इलेक्ट्रिक वाहनों पर बढ़ेगा।
इस योजना से पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही वायु प्रदूषण में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
रोजगार और कारोबार के नए अवसर
चार्जिंग स्टेशन बनने से केवल वाहन चालकों को सुविधा नहीं मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हाईवे किनारे होटल, ढाबा और अन्य छोटे कारोबारों को भी इसका फायदा मिल सकता है।
बिहार में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की यह पहल आने वाले वर्षों में परिवहन व्यवस्था को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अगर योजना समय पर लागू होती है तो राज्य के शहरों से लेकर गांवों तक इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।