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06-Mar-2026 11:57 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के लिए राहत की खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज छात्रों के व्यक्तिगत विवरण में सुधार करने की समय-सीमा को बढ़ा दिया है। पहले यह अंतिम तिथि 28 फरवरी निर्धारित की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 मार्च 2026 कर दिया गया है। इस फैसले से उन छात्रों को लाभ मिलेगा जिनके नाम, पिता के नाम, आधार संख्या या अन्य आवश्यक विवरण में त्रुटियां दर्ज हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को पत्र जारी किया है। पत्र में निर्देश दिया गया है कि जिलों के अधिकारी निर्धारित नई समय-सीमा के भीतर छात्रों के डेटा में मौजूद त्रुटियों को ठीक करें। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों के रिकॉर्ड पूरी तरह सही और अद्यतन हों।
विभाग के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 के दौरान ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों के विवरण दर्ज करते समय कई स्थानों पर तकनीकी और लिपिकीय गलतियां सामने आई थीं। इन त्रुटियों के कारण छात्रों को कई प्रकार की प्रशासनिक और वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए इन सभी त्रुटियों को सुधारने के लिए विभाग ने जिलों को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है।
चार लाख से अधिक छात्रों को मिलेगा लाभ
बिहार शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार फिलहाल राज्य के करीब चार लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के विवरण में किसी न किसी प्रकार की गलती दर्ज है। इन त्रुटियों में आधार कार्ड से विवरण का मेल न खाना, नाम की स्पेलिंग में अंतर, पिता के नाम में गड़बड़ी या बैंक खाते से संबंधित गलत जानकारी शामिल है। इन गड़बड़ियों के कारण कई छात्रों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और छात्रवृत्ति का लाभ मिलने में कठिनाई हो रही है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों के डेटा में सुधार के लिए दिया गया यह अंतिम अवसर है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 10 मार्च के बाद किसी भी परिस्थिति में इस समय-सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसलिए सभी जिलों के अधिकारियों को तय समय के भीतर सुधार प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
75 प्रतिशत उपस्थिति वाले छात्रों के डेटा को दी जाएगी प्राथमिकता
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर केवल उन्हीं छात्रों के विवरण में सुधार किया जाएगा जिनकी विद्यालय में उपस्थिति 75 प्रतिशत या उससे अधिक है। विभाग ने जिलों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे छात्रों की पहचान कर उनके रिकॉर्ड को प्राथमिकता के आधार पर अपडेट करें।
शिक्षा विभाग का मानना है कि उपस्थिति के इस मानक को पूरा करने वाले छात्रों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए। इसलिए स्कूल स्तर से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पात्र छात्रों का डेटा पूरी तरह सही और अपडेटेड हो।
अधिकारियों को सख्त निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग पहले भी कई बार जिला शिक्षा अधिकारियों को छात्रों के डेटा में सुधार करने के निर्देश दे चुका है। हालांकि कई जिलों में लक्ष्य पूरा नहीं हो सका, जिसके बाद विभाग ने दस दिन का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है।
विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (योजना एवं लेखा) को पत्र भेजकर यह भी चेतावनी दी है कि इस बार लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर निर्धारित समय के भीतर सुधार का काम पूरा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सत्र 2024-25 और 2025-26 से जुड़े सभी रिकॉर्ड को सही करना अनिवार्य है ताकि शैक्षणिक सत्र के अंत में किसी प्रकार की समस्या न हो।
सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए जरूरी है सही डेटा
बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को कई प्रकार की सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाता है। इनमें पोशाक राशि, छात्रवृत्ति और साइकिल योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं की राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाती है।
यदि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों का नाम, आधार नंबर या बैंक खाते की जानकारी गलत दर्ज होती है तो भुगतान की प्रक्रिया रुक जाती है। इसी कारण शिक्षा विभाग अब मिशन मोड में इन चार लाख से अधिक छात्रों के डेटा को सही करने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।